प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए जल्द ही एक बड़ी खुशखबरी मिलेगी। नैनो टेक्नोलॉजी का कमाल अब बच्चे के जन्म के बाद दिखेगा।
स्वच्छ और तंदुरुस्त बच्चे की पैदाइश के लिए अब महिलाओं को महीनों तक आयरन और पौष्टिक तत्वों के लिए तरह-तरह की गोलियां नहीं खानी पड़ेंगी। महिलाओं को अब ये सारे पौष्टिक तत्व साजो श्रृंगार(कॉस्मेटिक) से ही मिल सकेंगे।
सुनने में यह अजीब लगे, लेकिन देश में इस पर चल रहे शोध के पहले चरण में शोधकर्ताओं को बड़ी सफलता मिली है। आईआईटी मुंबई में प्रो. रिंटी बैनर्जी इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई हैं।
शोधकर्ता इस प्रोजेक्ट पर करीब दो साल से काम कर रहे हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी(पीयू) में सोमवार से नैनो टेक्नोलॉजी पर आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में प्रो. रिंटी ने ‘प्रेग्नेंट वुमन और कॉस्मेटिक’ थीम पर शोध पत्र में यह जानकारी दी।
पीयू के केमिस्ट्री ऑडिटोरियम में प्रो. रिंटी के शोध को सभी ने ध्यान से सुना और सवाल भी पूछे। उन्होंने बताया कि अमेरिका की बिल एंड मेलेंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से पिछले दो साल से शोधकार्य चल रहा है।
प्रो. रिंटी के साथ 26 अन्य शोधकर्ता भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि चूहों पर इसका सफल प्रयोग किया जा चुका है। अगले एक दो साल में कॉस्मेटिक में नैनो पार्टिकल को बाजार में लॉन्च कर दिया जाएगा।
सिंदूर और मेहंदी से मिलेगा आयरन
प्रो. रिंटी के अनुसार 80 फीसदी महिलाओं को प्रेग्नेंसी के समय डॉक्टर स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए आयरन और अन्य जरूरी टॉनिक लेने का सलाह देते हैं। लेकिन, कुछ रोज बाद ही महिलाएं गोलियां खानी छोड़ देती हैं।
नैनो पार्टिकल के खास प्रयोग को मुल्तानी, मेहंदी, क्रीम और सिंदूर जैसे कॉस्मेटिक में मिलाकर महिलाएं आसानी से प्रयोग कर सकेंगी। इससे महिलाओं को बिना टैबलेट खाए बच्चे के लिए पूरी खुराक मिल जाएगी। महिलाओं की त्वचा पर भी इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रो. रिंटी का दावा है कि इस नई नैनो टेक्नोलॉजी को खास तौर से ग्रामीण महिलाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। महिलाओं को इसके लिए 5 से 10 रुपये ही खर्च करने होंगे।
ग्रामीण महिलाओं पर होगा फोकस :
एक सर्वे के अनुसार देश के ग्रामीण इलाकों में 30 फीसदी और शहरों में 10 से 15 फीसदी बच्चों में ब्रेन डेवलपमेंट नहीं होने सहित कई बीमारियां पाई जाती हैं। यह प्रेग्नेंसी के समय उचित मात्रा में प्रोटीन नहीं लेने के कारण होता है।