शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही। पार्टी में माझे का जरनैल के नाम से मशहूर रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा चार नवंबर को समर्थकों के साथ तरनतारन के गांव चोला साहिब में शक्ति प्रदर्शन करेंगे और सुखबीर-मजीठिया की लीडरशिप को खुलेआम चुनौती देंगे। इसके लिए बैठकों का सिलसिला शुरू हो चुका है।
सांसद ब्रह्मपुरा ने कहा कि सुखबीर सभी को एकजुट करके चलने में असफल रहे हैं जिस कारण पार्टी आज इस मुकाम पर आकर खड़ी हो गई है। पार्टी का पंथक वोट बैंक नाराज हो चुका है। सिरसा डेरा प्रमुख को माफी देने से पहले, न तो उन्होंने किसी से सलाह मांगी और न ही उन्होंने कोर कमेटी की बैठक बुलाई। पार्टी को इससे बहुत नुकसान हुआ है।
ब्रह्मपुरा ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान बहिबल कलां में 2015 में पुलिस गोलीबारी में सिख प्रदर्शनकारियों की हत्या और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को माफ करने का विरोध किया गया था। किसी को पूछा ही नहीं गया। ब्रह्मपुरा ने चोला साहिब में किए जाने वाले 4 नवंबर के शक्ति प्रदर्शन पर कहा कि यह विधानसभा स्तर की बैठक है। जिसमें कार्यकर्ताओं के सामने अपनी बात रखनी है।