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Ayodhya Ram Mandir: चंडीगढ़ के तिलकधारी 1992 में कारसेवा के लिए गए थे अयोध्या, ईंट लाने पर 12 साल चला था केस

Wed, 03 Jan 2024 03:03 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

तिलकधारी के नाम से पहचाने जाने वाले रामजी लाल ने बताया कि वहां पर राम भक्तों का सैलाब था। उसके बाद हम लोग चंडीगढ़ आए तो चंडीगढ़ पुलिस भी अयोध्या जी गए उन लोगों की तलाश कर रही थी। पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। यह मुकदमा 1992 से लेकर 2006 तक चला। इसके कारण उन्हें 42 दिन की जेल में भी रहना पड़ा था।
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रामजी लाल तिलकधारी और राजिंदर कुमार - फोटो : फाइल
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विस्तार
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अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बीच कार सेवा करने वाले उन दिनों को याद कर रहे हैं। चंडीगढ़ के रामदरबार निवासी रामजी लाल तिलकधारी भी अयोध्या में कारसेवा के लिए गए थे। वे वहां से एक ईंट भी साथ ले आए थे। इसके कारण उन पर केस भी हुआ जो 12 साल तक चला। 
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रामजी लाल ने कहा कि 1992 में विश्व हिंदू परिषद ने आह्वान किया कि अयोध्या जी में कारसेवा के लिए आएं। कार सेवा में पूरे भारतवर्ष से राम भक्त पहुंचे थे। चंडीगढ़ से भी बहुत से राम भक्त अयोध्या गए थे। मैं भी अयोध्या गया। इसके बाद 6 दिसंबर 1992 का ऐतिहासिक दिन आया। उस दिन बहुत बड़ा पंडाल लगा हुआ था। उसमें संत समाज विराजमान था और संतों के प्रवचन चल रहे थे, प्रवचन सुनते सुनते बड़ी संख्या में राम भक्त उठे और विवादित ढांचे की ओर बढ़ चले। सभी राम नाम का उदघोष करते हुए उस ओर चल दिए थे। विवादित ढांचा शाम करीब पांच बजे तक ध्वस्त कर दिया गया और एक चबूतरा बनाकर कर उसके ऊपर टीन डालकर भगवान श्रीराम जी को विराजमान कर दिया गया था।

किसी ने पुलिस को दी थी सूचना 
तिलकधारी के नाम से पहचाने जाने वाले रामजी लाल ने बताया कि वहां पर राम भक्तों का सैलाब था। उसके बाद हम लोग चंडीगढ़ आए तो चंडीगढ़ पुलिस भी अयोध्या जी गए उन लोगों की तलाश कर रही थी। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस को किसी ने मेरी जानकारी दे दी थी कि वह अयोध्या गए थे और वहां से अपने साथ ऐतिहासिक ईंट लेकर आए हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर कर लिया और भी ऐतिहासिक ईंट को भी पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर मेरे खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। यह मुकदमा 1992 से लेकर 2006 तक चला। इसके कारण उन्हें 42 दिन की जेल में भी रहना पड़ा था।
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घर में बिना बताए चल दिए थे अयोध्या
चंडीगढ़ के राजिंदर कुमार घर में बिना बताए अयोध्या कार सेवा के लिए पहुंच गए थे। उस वक्त वे सेक्टर 46 के गवर्नमेंट कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष के छात्र थे। वह अयोध्या में तीन दिन तक रहे थे। उन्होंने बताया कि छह दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिरने के बाद जय श्रीराम के उदघोष से अयोध्या गूंजायमान हो रहा था। 

बकौल राजिंदर कुमार संगठन के निर्देश पर हम सभी अयोध्या गए थे। वह मंजर आज भी याद है। अब जब भगवान श्रीराम का मंदिर बन रहा है। साथ ही 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। हमारे मन में अपार हर्ष हो रहा है। यह कि पांच सौ वर्षों के अनवरत संघर्षों के बाद यह दिन देखने को मिल रहा है। लाखों लोगों की अपनी प्राणों की दी हुई आहुति कामयाब होती दिख रही है। हम सभी के लिए गौरव के क्षण हैं।
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