साध्वी रेप केस में सलाखों के पीछे पहुंचे राम रहीम की दो पीड़ितों ने पोल खोली है और उन्होंने बताया कि वह डेरा सच्चा सौदा में अनुयायियों को नपुंसक कैसे बनाता था। लायर्स फार ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल (एलएफएचआई) ने उन लोगों को निशुल्क कानूनी मदद की पेशकश की है, जो डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत रामरहीम के करतूतों से पीड़ित हैं। एलएफएचआई के एडवोकेट नवकिरण सिंह ने ऐसे सभी पीड़ितों से सामने आने की अपील की है, जो डेरामुखी के भय से अब तक मुंह खोलने से डर रहे थे।
प्रेस क्लब में बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में एडवोकेट नवकिरण के साथ फतेहाबाद निवासी पूर्व डेरा अनुयायी हंसराज मौजूद थे, उन्होंने नवकिरण के जरिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डेरामुखी पर अनुयायियों को नपुंसक बनाने के आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा हुआ है। याची ने जुलाई, 2012 में हाईकोर्ट में कुल 400 अनुयायियों की सूची सौंपते हुए उनमें से 166 को नपुंसक बनाने का आरोप लगाया था।
याची का कहना था कि डेरामुखी ने यह कहते हुए अनुयायियों को नपुंसक बनाया कि वे अगर खुद नपुंसक बनते हैं तो भगवान को पाने में सफल होंगे। नवकिरण ने बताया कि सीबीआई मामले में आगामी अक्तूबर माह में हाईकोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। इस मौके पर हंसराज ने बताया कि उसके माता-पिता डेरे के अनुयायी थे, इसलिए वह भी साल 1996 में 17 साल की उम्र में डेरे के अनुयायी बन गए थे।
बताया कि मुझे साल 2002 में श्री गंगानगर स्थित डेरे के अस्पताल में नपुंसक बनने के लिए मजबूर किया गया, जहां मेरे अलावा कई अन्य साधू (डेरा अनुयायी) भी थे। इसके लिए डेरामुखी ने मेरी सराहना की और मुझे एक नया गिटार दिया, क्योंकि उस समय मैं डेरे के म्यूजिक ग्रुप का सदस्य था। कुछ दिन बाद में मैंने महसूस किया कि नपुंसक बनाना एक अमानवीय कृत्य था, जिसके कारण मेरे शरीर में कई तरह के परिवर्तन होने लगे। मैंने तब डेरा छोड़ दिया।