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पांच करोड़ से बनेगा राजपूत भवन

Mon, 30 Dec 2013 01:06 AM IST
अमर उजाला, पंचकूला
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सेक्टर-26 में पांच करोड़ की अनुमानित लागत से महाराणा प्रताप भवन एवं राजपूत धर्मशाला का निर्माण होगा। यह तीन मंजिला भवन करीब 1850 वर्ग गज में बनेगा, जिसमें बेसमेंट सहित हर मंजिल पर एक-एक हॉल व 11-11 कमरे होंगे।
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मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को इस भवन का शिलान्यास किया। साथ ही अपने स्वैच्छिक कोष से 31 लाख रुपये देने की घोषणा की। समारोह में हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक कंवर निर्मल सिंह ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। 

उन्हाेंने कहा कि इस भवन में युवाओं के लिए पुलिस व सेना में भर्ती के लिए कोचिंग सेंटर चलाए जाने का प्रस्ताव है, जो सराहनीय है। आने वाला समय शिक्षा का है, जो समाज, प्रदेश व राष्ट्र शिक्षा में आगे जाएगा, वही भविष्य में अव्वल रहेगा।
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प्रति व्यक्ति निवेश में अव्वल है हरियाणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थाओं में दाखिले का 10 प्रतिशत का लाभ दिया गया।

वर्ष 2005 से पूर्व हरियाणा जहां प्रति व्यक्ति निवेश में 14 वें स्थान पर था, वहीं अब पहले नंबर पर है।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक व कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सतविन्द्र राणा, पंचकूला राजपूत सभा के अध्यक्ष ठाकुर राम स्वरूप, कार्यकारी अध्यक्ष कर्नल कुलदीप सिंह, मुख्यमंत्री के राजनैतिक सलाहकार प्रो. वीरेन्द्र, पंचकूला की मेयर उपेन्द्र कौर आहलुवालिया, अतिरिक्त मीडिया सलाहकार केवल ढींगरा, डीसी डॉ. एसएस फुलिया, डीसीपी अश्विन शेणवी, एडीसी एसपी अरोड़ा, एसडीएम गुरमीत सिंह, पार्षद सलीम खान, पार्षद ओमवती पुनिया सहित राजपूत सभा पंचकूला के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

निर्मल सिंह के कार्यकाल में मजबूत हुआ लॉ एंड आर्डर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने ही कंवर निर्मल सिंह को डीजीपी लगाया था। उनके अलावा कोई ऐसा कर भी नहीं सकता था।

निर्मल सिंह जल्दी रिटायर हो गए, नहीं तो अब तक उन्हें डीजीपी पद पर रखते। निर्मल सिंह को डीजीपी लगाने का मकसद प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर व पुलिस को मजबूत करना था और ऐसा हुआ भी।

मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया
कार्यक्रम के दौरान सेक्टर-26 के बाशिंदे अपनी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन मिल नहीं पाए। अफसरों ने लोगों को सीएम तक पहुंचने ही नहीं दिया।
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लोग सड़कों और सफाई व्यवस्था की बदहाली के बारे में सीएम से शिकायत करना चाहते थे।
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