उन्होंने बताया कि भगत सिंह जब कॉलेज में पढ़ते थे तो उस समय वे इस पुस्तकालय में किताबें पढ़ने के लिए आते थे। धीरे धीरे उनकी यहां के लाइब्रेरियन राजा राम शास्त्री से दोस्ती हो गई। बाद में राजा राम भी उन्हें कौन सी किताबें पढ़नी है, उसकी सलाह देते थे। भगत सिंह को क्रांतिकारियों के जीवन पर किताबें पढ़ने का बड़ा शौक था। अलका ने बताया कि राज राम शास्त्री की किताब अमर शहीदों के संस्मरण में भगत सिंह के बारे में लिखा गया है। भगत सिंह को कार्ल मार्क्स और लेनिन की किताबें बहुत पसंद थीं। वे क्रांतिकारियों और क्रांतिकारी सिद्धांतों की किताबों को खूब पसंद करते थे।
अलका ने बताया कि भगत सिंह ने गॉड एंड स्टेट, मदर, द जंगल, ए नोवेल किंग कोल, लेस मिजरेब्लस, ऑयल ए नोवेल, सिविल वार इन फ्रांस, मार्टिन चुजलेविट, लाइफ ऑफ वाल्टायर, गैरीबाल्डी एंड द मेकिंग ऑफ इटली, गैरी बाल्डी एंड हिज रेड शर्टस सहित अन्य किताबें उन्होंने पढ़ी हैं। इन किताबों को संरक्षित किया जा रहा है।
भगत सिंह की पढ़ीं किताबें अब डिजिटल रूप में होंगी उपलब्ध
लाइब्रेरियन अलका का कहना है कि भगत सिंह की पढ़ीं किताबें अब विरासत की चीज बन गई हैं। उसे पढ़ते हुए पन्ना पलटने पर खराब न हो जाए। इसके लिए समय समय पर प्यूमिगेशन होता रहता है। अब उनके द्वारा पढ़ी किताबों को डिजिटल रूप में लाया जा रहा है। अब लोग उनके किताबों को मैनुअल के साथ उसे कंप्यूटर में भी पढ़ सकेंगे।
भगत सिंह को दी गई श्रद्धांजलि
अलका ने बताया कि सेक्टर- 15 स्थित लाला लाजपत राय के द्वारका दास लाइब्रेरी में शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर उनके द्वारा पढ़ी गईं 24 किताबों के अलावा भगत सिंह पर लिखी गई अन्य लेखकों की किताबों की प्रदर्शनी लगाई गई। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने 23 मार्च को भगत सिंह की शहीदी दिवस पर अवकाश निर्धारित किया है। इसलिए एक घंटे का ही समारोह होगा। पुस्तक प्रदर्शनी लोगों के लिए 24 मार्च को भी खुला रहेगी।