13 साल पहले एक्वॉयर की गई जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं देने पर कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया। मोहाली रेलवे लाइन के लिए करीब 13 साल पहले एक्वॉयर की गई जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं देने के मामले में जिला अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मोहाली रेलवे स्टेशन की कुर्की के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा स्टेशन मास्टर का सरकारी वाहन, दफ्तार की बिल्डिंग, रेलवे मुलाजिमों की रिहायश वाली सरकारी बिल्डिंग, कंप्यूटर, कुर्सियां, टेबल, अलमारियाें को भी अटैच करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई आठ जुलाई को होगी। मंगलवार को ढोल बचाकर अटैचमेंट के आदेश रेलवे स्टेशन पर चिपकाए गए। हालांकि, रेलवे के अफसरों ने कोर्ट के आदेश की कापी लेने से मना कर दिया। अफसरों ने इस संबंध में दलील की कि उनका हेड आफिस अंबाला में है। ऐसे में आदेश की काफी वहां ही दी जाए।
जानकारी के मुताबिक, गांव रायपुर खुर्द के कई परिवारों ने बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं मिलने पर रेलवे के खिलाफ अदालत में केस दायर किया था। इसके बाद अदालत ने रेलवे को मुआवजा बढ़ा कर देने को आदेश दिए थे। लेकिन, रेलवे ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद किसानों ने दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने यह फरमान जारी किया है। जिक्रयोग है कि वर्ष 2002 में रेलवे लाइन बिछाने और जमीन एक्वॉयर करने के संबंध में नोटिफिकेशन जारी हुआ था। रेलवे ने पांच लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने का आदेश दिया था। कई लोग इसका विरोध करते हुए अदालत चले गए थे। इसके बाद अदालत ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 17 लाख कर दी थी।