सरकार पर उठ रही थीं उंगलियां
पराली जलाने की घटनाएं लगातार सामने आने से पंजाब सरकार के एक्शन प्लान को लेकर लगातार उंगलियां उठ रही हैं। इसके चलते अब सरकार एक्शन मोड में आ गई है। किसानों के विरोध के बावजूद सरकार ने पराली जलाने वाले 28 किसानों की रेड एंट्रियां कर दी हैं। रेड एंट्री वाले किसान न तो अपनी जमीन को बेच पाते हैं और न ही इसे गिरवी रख पाते हैं। इसके साथ ही रेड एंट्री होने पर प्रभावित किसान खेती ऋण भी नहीं ले सकता है। इसके साथ ही पांच किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पराली जलाने के आरोपी किसानों को कुल 1 लाख 5000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
पीपीसीबी के चेयरमैन डा. आदर्शपाल विग ने इसकी पुष्टि करते कहा कि लगाए जुर्माने में से 75 हजार रुपये की रिकवरी भी कर ली गई है। बाकी की भी जल्द रिकवरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आगे भी इसी तरह से कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एक बार फिर से किसानों को अपील की कि पराली न जलाएं, इससे हवा प्रदूषित होती है और साथ ही खेतों की उपजाऊ शक्ति भी कम होती है। उन्होंने कहा कि इस बार निचले स्तर तक किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनें मुहैया कराई जा रही हैं। किसानों को इसका लाभ उठाना चाहिए।
59 मामलों के साथ अमृतसर पहले नंबर पर
शुक्रवार को पंजाब में कहीं पराली नहीं जली। इससे पराली जलाने के कुल मामले 98 ही बने रहे। साल 2022 में भी आज के दिन पराली नहीं जली थी, लेकिन 2023 में 21 मामले हुए थे। पंजाब में पराली जलाने में जिला अमृतसर 59 मामलों के साथ पहले नंबर पर बना है। वहीं 15 सितंबर से लेकर अब तक सात मामलों के साथ जिला गुरदासपुर दूसरे नंबर पर है।
इसके अलावा तरनतारन से छह, फिरोजपुर से चार मामले, जालंधर से भी चार, कपूरथला से छह, एसबीएस नगर से एक, फतेहगढ़ साहिब से भी एक, पटियाला से एक, रूपनगर से भी एक, एसएएस नगर से 5, संगरूर से 3 मामले सामने आए हैं। बारिश के कारण शुक्रवार को पंजाब के शहरों के एक्यूआई में बीते दिनों की अपेक्षा सुधार दर्ज किया गया है। बठिंडा का सबसे अधिक 82, अमृतसर का 68, मंडी गोबिंदगढ़ का एक्यूआई 67, खन्ना का 46, जालंधर का 44, पटियाला का 36 दर्ज किया गया।
वहीं पराली जलाने के मामलों पर मंत्री गुरमीत सिंह खुद्डियां ने कहा कि आग एक-दो जगह लग रही है। हर जगह मशीनें पहुंच गई हैं। किसान भी समझता है कि उसे पराली नहीं जलानी चाहिए। उसे पता है कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम होती है। हमने करीब 1,37,000 मशीनें दी हैं। हमने पिछले साल 350 करोड़ रुपये की मशीनरी दी थी और इस बार हम 500 करोड़ रुपये की मशीनरी दे रहे हैं, जिसमें 60% केंद्र सरकार की है और 40% पंजाब सरकार का योगदान है। हमारे पास एक वॉर रूम है और हमारे सभी अधिकारियों ने गांवों में 2000 मीटिंग की हैं। हमने अपने अधिकारियों से कहा है कि वे लोगों को जागरूक करें ताकि किसान समझें कि पराली नहीं जलानी चाहिए। हमने एक ऐप लॉन्च किया है जिसमें अगर किसी किसान को पराली काटनी है तो वह हमसे मदद ले सकता है।