राहत इंदौरी ने बताया कि वह फिल्म डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म के लिए गीत लिख रहे हैं। वह फिल्म कश्मीरी पंडितों पर आधारित है। फिल्म का ज्यादातर हिस्सा शायरी में ही है। वैसे भी मैंने फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस और मिशन कश्मीर के लिए जो गीत लिखे उनको लोगों ने काफी प्यार दिया। फिल्म ‘इश्क’ का गीत ‘नींद चुराई तूने मेरी ओ सनम...’ मुझे काफी पसंद है।
एक सवाल के जवाब में राहत इंदौरी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि वह मुंबई छोड़कर चले गए हैं, यदि अच्छा काम मिलेगा, तो जरूर जाऊंगा। उन्होंने कहा कि अब मुशायरों में कई बदलाव आ चुके हैं। अगर आज देश में 60 मुशायरे होते हैं तो उसमें से 40 ऐसे होते हैं, जिनमें दोयम दर्जे के शायर होते हैं। अब कहीं-कहीं पर शायरी तुकबंदी बन चुकी है तो कहीं पर गद्य। अब बाजारवाद का दौर है और इस दौर में मुशायरों का भी बाजारीकरण हो रहा है।
पहले हर जुबान में होती थी शायरी
जुबान की बात करें तो पहले यह पैदा होती है, जवान होती है और फिर बूढ़ी होने के बाद खत्म हो जाती है। किसी जुबान को आप कोई दर्जा नहीं दे सकते हैं। अब जुबान के हिसाब से शायरी नहीं होती है, पहले जुबान के हिसाब से ही शायरी होती थी। गालिब जैसे शायर भी कहते थे कि यदि पढ़ना है तो उनकी फारसी शायरी पढ़े। भाषा तो सिर्फ उर्दू ही नहीं। अब सभी भाषाओं का हाल एक जैसा हो चुका है। हमारी एक और समस्या है कि भावनाओं को प्रकट करने की आजादी कुछ ज्यादा हो चुकी है।