हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब सरकार को लीगल नोटिस पर तय कानून के तहत उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया था। याचिका के अनुसार राज्य सरकार जानबूझकर राज्य के दो पूर्व मंत्रियों और तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की मदद करने के लिए मामले की जांच में देरी कर रही है।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो आरोपियों के बैंक व संपत्ति के पूरे रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। दो पूर्व मंत्रियों शरणजीत ढिल्लों व जेएस सेखों और तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों केबीएस सिद्धू, सर्वेश कौशल व केएस पन्नू के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। विजिलेंस ब्यूरो ने कोर्ट को बताया कि केबीएस सिद्धू की याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है जिसमें अदालत ने विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई पर रोक लगाई है।
सिंचाई घोटाला 2017 में सामने आया था और विजिलेंस विभाग ने एक ठेकेदार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान उसने बयान में दो पूर्व मंत्रियों, तीन पूर्व आईएएस अफसरों और कुछ इंजीनियरों के नाम लिए थे। आरोप के अनुसार ठेकेदार गुरिंदर सिंह को 2007 से 2016 तक 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के काम अलॉट हुए थे। उसने इन अफसरों, पूर्व मंत्रियों को पैसा दिया। 2006 में उसकी कंपनी 4.75 करोड़ रुपये की जो मात्र दस वर्ष में 300 करोड़ रुपये की हो गई।