गौरतलब है कि पंजाब सरकार की ओर से इस साल मार्च में बुलाए गए विधानसभा के बजट सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद जून में विस्तारित सत्र के रूप में दो दिन के लिए बुलाया और उसके बाद अक्तूबर में भी बजट सत्र का ही दो दिवसीय विस्तारित सत्र बुलाया था।
राज्यपाल ने इन दोनों विस्तारित सत्रों को गैरकानूनी ठहराते दिया था और जून के सत्र में पारित पांच बिलों को अब तक मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद अक्तूबर में बुलाए सत्र में राज्यपाल ने तीन वित्त विधेयक पेश करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था, जिसके विरोध में पंजाब सरकार राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की ओर से दोनों पक्षों को दी गई हिदायतों के बाद शुक्रवार को पहला अवसर है, जब दोनों पक्षों ने व्यवहारिक मापदंड को अपनाते हुए एक-दूसरे को गंभीरता से लिया है।
सीएम ने शुक्रवार सुबह लिखा था पत्र
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार सुबह राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को पत्र भेजकर, कुछ माह पहले विधानसभा में पारित पांच विधेयकों को तुरंत मंजूरी देने की अपील की। उन्होंने लिखा कि पांच में से चार बिल इस साल 19 व 20 जून को हुए बजट सत्र की बैठक में पास किए गए थे। इन बिलों में सिख गुरुद्वारा (संशोधन) बिल 2023, पंजाब पुलिस (संशोधन) बिल 2023, पंजाब ऐफीलीएटिड कॉलेज (सेवा की सुरक्षा) (संशोधन) बिल 2023, पंजाब यूनिवर्सिटीज कानून (संशोधन) बिल 2023 और पंजाब राज्य विजिलेंस कमीशन (रिपील) बिल 2022 शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट के 10 नवंबर के आदेश में दर्शाई गई संवैधानिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र के सरोकारों की भावना का सम्मान करते हुए फैसला लिया जाए।