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Tarn Taran RPG Attack: आईएसआई के इशारे पर आतंकी लंडा ने दो नाबालिगों से कराया था हमला

Fri, 16 Dec 2022 01:48 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि यह आरपीजी मुजाहिदीन द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। वहीं आरोपियों से हथियार और मोटरसाइकिल बरामद हुए हैं।
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डीजीपी गौरव यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब पुलिस ने तरनतारन के सरहाली थाने पर आरपीजी (रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड) हमले को सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने दो नाबालिग समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हमले की साजिश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर कनाडा के आतंकी लखबीर सिंह लंडा ने यूरोप में बैठे अपने दो साथियों के साथ रची थी। थाने पर आरपीजी तरनतारन के दो नाबालिगों ने दागा था। इन दोनों ने यूट्यूब और वीडियो कॉल पर लंडा के निर्देशों पर आरपीजी चलाना सीखा। इन नाबालिगों में से एक दसवीं फेल है और दूसरा बारहवीं। 

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पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि नवंबर के आखिर में पाकिस्तान में नया सेना प्रमुख बनते ही भारत के खिलाफ बड़ा हमला करने की तैयारी शुरू हो गई थी। लंडा ने यूरोप में अपने दो साथियों सतबीर सिंह सत्ता और गुरदेव सिंह जैसल के जरिए हमले के लिए एक आतंकी मॉड्यूल तैयार किया। इस पूरे ग्रुप को साढ़े आठ लाख रुपये की फंडिंग हुई थी। 

पूरे नेटवर्क को पंजाब की गोइंदवाल साहिब जेल में बंद अजमीत सिंह ने सहयोग दिया। कुछ दिन पहले तरनतारन में हुई व्यापारी की हत्या में अजमीत मुख्य आरोपी था। पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान नौशेरा पन्नुआ निवासी गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी (18), छोला साहिब निवासी गुरलाल सिंह गहला (19), गांव ठठिया महंता निवासी गुरलाल सिंह उर्फ लाली (21) और नौशेरा पन्नुआ निवासी जोबनप्रीत सिंह उर्फ जोबन (18) के रूप में हुई है। गुरदेव तीन साल पहले और सतबीर सत्ता इसी साल जून में यूरोप भाग गया था। सत्ता पर कुरुक्षेत्र में आरडीएक्स छिपाने का भी आरोप है। 

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पुलिस के मुताबिक गुरप्रीत गोपी एक मामले में जेल में बंद था। नाबालिग होने के कारण उसे 22 नवंबर को जमानत मिल गई थी और इसके एक दिन बाद में बालिग हो गया था। लंडा और सत्ता का यह लोकल एरिया था। इस दौरान वह उनके संपर्क में आ गया था। आरपीजी अटैक के बाद दोनों नाबालिग गांव सैदों की तरफ बाइक पर निकले और गांव चंबा के ट्यूबवेल पर पहुंच गए। 

लंडा ने ही वहां पर उनके रुकने का इंतजाम किया था। आरोपियों से 32 बोर की पिस्तौल और 15 कारतूस बरामद हुए हैं। जोबनप्रीत और गुरलाल के कब्जे से प्वाइंट 30 बोर की पिस्तौल व 35 कारतूस बरामद हुए हैं। वहीं, वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल भी बरामद कर लिया गया है। गोपी से एक हैंड ग्रेनेड भी बरामद हुआ है।

एक दूसरे को नहीं जानते थे आरोपी 
डीजीपी ने बताया कि मास्टरमाइंड लंडा ने इस बार साजिश कट आउट व डेड लेटर बॉक्स के आधार पर रची। आरपीजी दागने वाले और हथियार पहुंचाने वाले आरोपी एक दूसरे को नहीं जानते थे, ताकि एक के पकड़े जाने पर जांच आगे न बढ़ सके। लंडा व उसके यूरोप के साथियों ने वीडियो कॉल कर एक दूसरे को गाइड किया। हमले के लिए किसी को कोई शारीरिक प्रशिक्षण नहीं दिया गया था।  
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हमले से आठ दिन पहले आया था आरपीजी
जांच में सामने आया है कि हमले से आठ दिन पहले आरपीजी सीमा पार से मंगवाया गया था। एक दिसंबर को आरपीजी तरनतारन के गांव झंडेर में पहुंचाया गया। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि सीमा पार से आरपीजी कैसे आया। इसके बाद लंडा की ओर से निर्देश मिलने के बाद गोपी और जोबनप्रीत ने आरपीजी और अन्य हथियारों की खेप हासिल की, जिसे गांव महराना में छिपा दिया गया। इसके बाद दो अन्य लोगों ने वहां से आरपीजी निकालकर आठ दिनों तक अपने पास रखा। ये आरोपी चोला साहिब के रहने हैं और अभी पकड़े नहीं गए हैं। इसके बाद लंडा ने दोनों नाबालिगों को हमले वाले दिन नौ दिसंबर को इकट्ठा किया। हमले से पहले गुरलाल ने नाबालिगों को एक लाख रुपये दिए और फिर दोनों ने बाइक पर जाकर वारदात को अंजाम दिया।

अफगानिस्तान में मुजाहिदीन करते हैं आरपीजी का इस्तेमाल
डीजीपी ने बताया कि हमले में सोवियत युग के 70 एमएम बार के आरपीजी 26 का इस्तेमाल किया गया था। आमतौर पर इसका इस्तेमाल अफगानिस्तान में मुजाहिदीन करते हैं। पूरे मामले को सुलझाने के लिए पुलिस ने टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन और सीसीटीवी कैमरों की स्टडी की। खुफिया इनपुट्स के आधार पर भी पुलिस को मदद मिली है। 
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