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Punjab News: पठानकोट में लदपालवां टोल प्लाजा कराया बंद, चोलांग में टोल कर्मी और किसान भिड़े

Thu, 15 Dec 2022 10:13 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)

सार

प्रधान जितेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र की वादाखिलाफी के चलते किसानों को एक बार फिर सड़क पर उतरना पड़ा, क्योंकि केंद्र सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी हैं। इस कारण उन्हें टोल प्लाजा पर धरना देना पड़ा और यह संघर्ष अब एक माह चलेगा। 
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किसानों और टोल कर्मियों के बीच तनाव। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पठानकोट-अमृतसर नेशनल हाईवे पर स्थित लदपालवां टोल बैरियर पर केंद्र सरकार के खिलाफ किसान संगठनों का धरना शुरू हो गया। किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वादाखिलाफी का इल्जाम लगाया। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के जोन प्रधान जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में एक महीने के लिए धरना शुरू किया गया है। इस दौरान किसानों ने बैरियर के बीचोंबीच राशन व अन्य जरूरतों से भरी ट्रालियां खड़ी कर दीं ताकि, टोल बैरियर बंद न हो सके। 

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इस दौरान किसी वाहन चालक को टोल नहीं देने दिया गया। धरने पर बैठे किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के जोन प्रधान जतिंदर सिंह, कुलजीत सिंह, बख्शीश सिंह, सोहन सिंह समेत अन्यों ने केंद्र सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब के अलग-अलग जिलों में टोल प्लाजा फ्री किए गए हैं। वहीं पठानकोट-अमृतसर नेशनल हाईवे पर स्थित लदपालवां टोल प्लाजा भी अगले एक माह तक बंद रहेगा। किसी भी गाड़ी से अब टोल नहीं लिया जाएगा। 

किसानों ने केंद्र सरकार को चेतावनी भी दी है कि अगर केंद्र सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो आने वाले समय में वह अपना संघर्ष और तेज करेंगे। प्रधान जितेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र की वादाखिलाफी के चलते किसानों को एक बार फिर सड़क पर उतरना पड़ा, क्योंकि केंद्र सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी हैं। इस कारण उन्हें टोल प्लाजा पर धरना देना पड़ा और यह संघर्ष अब एक माह चलेगा। 

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उन्होंने कहा कि एमएसपी समेत अन्य मांगें केंद्र सरकार के समक्ष रखी गई थी, जो आज तक पूरी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अंग्रेजों वाली नीति पर चल रही है। इसके चलते अपने किए हुए वादे को भूल चुकी सरकार ने किसानों को फिर सड़कों पर उतरने पर विवश किया है। उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम देते हैं। अगर एक महीने में अपनी की गई गलतियों को नहीं सुधारा तो वह इस संघर्ष को और तीखा करेंगे।

चोलांग में टोल कर्मी और किसान भिड़े
होशियारपुर के चोलांग टोल प्लाजा पर गुरुवार दोपहर किसान और टोल कर्मियों में टकराव हो गया। अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से डीसी दफ्तरों के आगे मोर्चा खोलकर बैठे किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने 15 दिसंबर को अलग-अलग जिलों के टोल प्लाजा को पक्का मोर्चा लगाकर एक माह तक बंद करने का एलान किया था। चोलांग टोल प्लाजा कर्मचारी इसका विरोध कर रहे थे और उन्होंने टोल बंद करने पहुंचे किसानों के विरोध का कार्यक्रम बनाया था। 

गुरुवार सुबह किसानों के पहुंचने से पहले टोल पर बड़ी संख्या में कर्मचारी जमा हो गए थे और किसी तरह का विवाद न हो इसके लिए विभिन्न थानों की भारी संख्या में पुलिस भी मौजूद थी। दोपहर को किसान जत्थेबंदी के सदस्य प्रांतीय नेता सविंदर सिंह चुताला, जिला महासचिव कुलदीप सिंह बेगोवाल और जिला प्रधान परमजीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में टोल प्लाजा पर पहुंचे तो टोल कर्मियों का उनसे टकराव हो गया। इस दौरान कुछ लोगों को चोट भी आई। पुलिस टीम ने हल्का बल प्रयोग कर टकराव को रोका। प्रांतीय नेता चुताला ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर निर्धारित कार्यक्रम के तहत शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने पहुंचे थे लेकिन सरकार व विधायक टांडा की शह पर उनके साथ टोल कर्मियों ने टकराव की स्थिति पैदा की।
 
उधर, टोल कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे हरविंदर पाल सिंह सोनू ने कहा कि किसान संगठन के सदस्यों ने कर्मचारियों को धमकाया और पीटा है। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। एसडीएम ने वहां पहुंच टोल कर्मियों व किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए राजी किया और माहौल शांत कराया। 

किसानों की मुख्य मांगें
  • आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवार को मुआवजा व सरकारी नौकरी।
  • फसलों का नुकसान होने पर किसानों को 17 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने की बात हुई है। सरकार ने फसली नुकसान के मुआवजे के लिए 5400 रुपये प्रति एकड़ से लेकर 12 हजार प्रति एकड़ का मापदंड बनाया है।
  • केंद्र सरकार आंदोलन समाप्त करवाते वक्त किए अपने वादों को पूरा करे।
  • किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग।
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