केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि पराली जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ने लगी हैं और खासतौर पर पंजाब और राज्य सरकार ने खेतों में आग रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। लगातार खराब हो रहे वायु गुणवत्ता सूचकांक को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों को अल्टीमेटम दिया है। केंद्र ने कहा है कि राज्य प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों की जवाबदेही तय करें। तमाम कवायद के बाद भी पराली पंजाब में सबसे अधिक जलाई जा रही है। इसे लेकर केंद्र ने राज्य प्रशासन से सक्रियता के साथ काम करने के लिए कहा गया है, ताकि पराली को जलने से रोका जा सके।
बुधवार को फसल अवशेष प्रबंधन के मुद्दे पर राज्यों के साथ मंत्री स्तरीय बैठक में केंद्रीय कृषि और पर्यावरण मंत्री के अलावा सीपीसीबी, वायु गुणवत्ता आयोग, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली सरकार के प्रतिनिधियों और पर्यावरण मंत्रियों ने भाग लिया। केंद्र ने कहा कि पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने चिंता व्यक्त की है कि पंजाब सरकार राज्य में खेत की आग को रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हरियाणा में पराली प्रबंधन की स्थिति पंजाब की तुलना में काफी बेहतर है।
पूसा बॉयो डी- कंपोजर के कम छिड़काव पर जताई नाराजगी
बैठक में कहा गया कि 15 अक्तूबर तक पिछले साल की तुलना में आग की घटनाओं का रुझान कम था लेकिन अब यह खासकर पंजाब में तेजी से बढ़ने लगा है। मंत्रियों ने कहा कि पूसा बॉयो-डीकंपोजर एक माइक्रोबायल समाधान है, जो पराली को 15-20 दिनों में खाद में बदल देता है लेकिन पंजाब सरकार इसे सही तरीके से नहीं ले रही है। राज्य में बहुत कम क्षेत्र में इसका छिड़काव किया गया है।
पंजाब में मशीनों की डिलिवरी में देरी चिंताजनक
पंजाब के मुख्य सचिव को अमृतसर में आग की घटनाओं की बढ़ती दर को नियंत्रित करने और पिछले साल की तुलना में खेतों में आग के मामलों में 50 प्रतिशत की कमी सुनिश्चित करने के निर्देश था। बैठक में कहा गया कि मुख्य चिंताओं में से एक पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की डिलीवरी में देरी है।
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि पंजाब और हरियाणा सालाना लगभग 27 मिलियन टन धान की पुआल पैदा करते हैं, जिसमें से लगभग 6.4 मिलियन टन का प्रबंधन नहीं किया जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के अनुसार, पंजाब में पिछले साल 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच 71,304 खेतों में आग लगी और 2020 में इसी अवधि में 83,002 खेतों में आग लगाई गई।