हथियार और ड्रग्स तस्करी में गिरफ्तार चार आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि सीमा पार से नशों और हथियारों की तस्करी करने की साजिश गुरदासपुर जेल में रची गई थी। मनप्रीत ने आगे अमनप्रीत, सिमरनजीत और सुखवंत को बीएसएफ के कांस्टबेल सुमित कुमार से अवगत करवाया था। इन खुलासों के बाद जालंधर ग्रामीण पुलिस ने सिमरजीत और मनप्रीत को 12 जुलाई को गिरफ्तार किया था।
वहीं, डीजीपी पंजाब ने 11 जुलाई को डीजी बीएसएफ के पास निजी तौर पर यह मामला उठाने के बाद कांस्टेबल सुमित कुमार को बीएसएफ से तालमेल करके गिरफ्तार कर किया। दिनकर गुप्ता ने कहा कि बीएसएफ के कांस्टेबल सुमित ने सीमा पार से बार-बार नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी में अपने शामिल होने का खुलासा किया है।
पहली बार उसने सरहदी पार से 15 पैकेट हेरोइन प्राप्त करने और आगे भेजने में सहायता की थी। दूसरी बार उसने 25 पैकेट हेरोइन और सरहद पर 9 मिलीमीटर की एक जिगाना पिस्तौल की डिलीवरी ली। कुछ अंजाने व्यक्तियों को यह हेरोइन देने के बाद उसने पिस्तौल अपने पास रख ली थी। सुमित को नशीले पदार्थ और हथियारों की खेप आगे भेजने के तौर पर 39 लाख रुपये मिले थे।
पहले उसे 15 लाख और फिर 24 लाख रुपये दो किस्तों में मिले थे। डीजीपी ने कहा कि अब तक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि हत्याकांड में जमानत मिलने के बाद सिपाही सुमित कुमार को सांबा सेक्टर में एक गार्ड टावर में तैनात किया गया था, जहां से वह पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सरहद पर निगरानी रखता था। वह तस्कर मनप्रीत सिंह और सुखवंत सिंह के संपर्क में रहता था और आगे से यह दोनों पाकिस्तान के शाह मूसा से बात करते थे।
मॉड्यूल के काम करने का विवरण देते हुए दिनकर गुप्ता ने कहा कि नशे की खेप और हथियारों की फोटो पाकिस्तान से प्राप्त होने के बाद मनप्रीत सिंह और सुखवंत सिंह अपने मोबाइल फोन से सिपाही सुमित कुमार को भेजते थे। दूसरी और सुमित इधर से सरहदी कंटीली तार की तस्वीरें, उस स्थान का स्क्रीनशॉट, सरहदी पिल्लर के नंबर और इलाके के आसपास के गांवों का विवरण सरहद पार करने वाले तस्करों और सहयोगियों को भेजता था।
वे पाकिस्तानी तस्करों के साथ डिलीवरी के लिए तालमेल करते थे। डीजीपी ने कहा कि बाद में खेप की सुपुर्दगी के लिए पूर्व-निर्धारित तारीख और समय पर पाकिस्तानी तस्करों द्वारा अपना आदमी आमतौर पर दोपहर को स्थान की टोह लेने और सुमित से संपर्क स्थापित करने भेजा जाता था। उन्होंने कहा कि फिर उसी रात ही पाकिस्तानी तस्कर सिपाही सुमित कुमार की शिफ्ट ड्यूटी के दौरान पहले से निर्धारित जगह पर आते थे और लाइट के सिग्नल के रूप में सुमित से हरी झंडी मिलने के बाद ड्रग व हथियारों की खेप को सरहद की बाड़ के ऊपर से फेंक देते थे।
सुमित बाद में इस खेप को प्राप्त कर नजदीकी झाड़ियों में छिपा देता था। बाद में सुमित अगली शिफ्ट के दौरान अगले दिन सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक अपने साथियों के दिशा-निर्देशों पर अपने गार्ड टावरों से लगभग 50 मीटर की दूरी पर यह खेप सौंप देता था।