1992 में विवादित ढांचा गिरने के बाद तरुण ने राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ाई। भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती के संपर्क में आने के बाद तरुण ने जिला भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाई। पंजाब भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव बने।
पंजाब भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालते हुए तरुण ने देश की एकता व अखंडता को बनाए रखने के लिए अमृतसर से लेकर अटारी बार्डर तक मानव श्रृंखला बनाई थी। उस कार्यक्रम में उमा भारती विशेष रूप में पहुंची थीं। इसी कार्यक्रम ने तरुण चुघ की पहचान प्रदेश व देश के वरिष्ठ नेताओं के बीच बना दी थी।
तरुण चुघ ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कमल शर्मा के साथ साइकिल पर बैठकर पार्टी का प्रचार व प्रसार किया। 2000 से 2003 तक चुघ प्रदेश भाजपा सचिव रहे। 2005 में उन्हें प्रदेश प्रशिक्षण सेल का अध्यक्ष बनाया गया।
दो बार विधानसभा चुनाव लड़ा
चुघ ने केंद्रीय विधानसभा हलके से दो बार 2012 व 2014 में चुनाव लड़ा लेकिन दोनों बार उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। 2012 के चुनाव में वह अपने घर का बूथ तक हार गए थे।