अन्न का अपमान यानी मेरा अपमान... यह वचन हैं भगवान के। धरती पर अन्न की बर्बादी ने उनको चिंता में डाल दिया है... क्या करें... जिससे बर्बादी को रोका जा सके... इसी पशोपेश में पड़े हैं।
ऐसी स्थिति में ईश्वर एक स्पेशल एसाइनमेंट लेकर निकल पड़ते हैं धरती की ओर। यह है नाटक फीड द नीड का एक दृश्य। इसका मंचन पंजाब कला भवन में किया गया।
नाटक का माध्यम से समाजसेवी संस्था समाज संरक्षण समिति द्वारा दिखाया गया कि किस तरह से होटलों, रेस्टोरेंट्स और घरों के संग ही शादियों के दौरान खाने की बर्बादी होती है।
नाटक में चंडीगढ़ के मेयर हरफूलचंद्र कल्याण मुख्य अतिथि थे।
नाटक केंद्रित है दो दोस्तों रोहन और उसके दोस्त की कहानी पर। रोहन नास्तिक है और उसका दोस्त आस्तिक। कहानी की शुरुआत होती है स्वर्गलोक से। ईश्वर बैठे चिंतन कर रहे हैं कि कैसे अन्न की बर्बादी रोकी जाए, इतने में नारद मुनि आते हैं और फल खाते हैं, थोड़ा सा खाकर वह उसको फेंक देेते हैं।
ईश्वर उनको कुछ कहने की बजाय कहते हैं कि वह उनको एक स्पेशल एसाइनमेंट पर ले जाना चाहते हैं। यहीं से शुरुआत होती है दो दोस्तों की कहानी की। रोहन नास्तिक है और वह किसी पर यकीन नहीं करता। रोहन किसी प्रकार से खाना नहीं खा पाता।
इसको दिखाने के लिए डायरेक्टर अमित चांदपुरी ने थांगटा, टैंगो, एक्रोबैट, माइंस आदि आर्ट फार्म का प्रयोग किया है। रोहन का दोस्त नाटक के माध्यम से ही फूड सेफ्टी पर अपने विचार व्यक्त करता है।
नाटक में अमित चांदपुरी ने रोहन, कबीर खान ने उनके आस्तिक दोस्त का किरदार किया है। इसके अतिरिक्त नाटक में अर्श मुनौव्वर, जहान कोहली और सुरभि हांडा हैं।