हरियाणा के 9 एचसीएस अफसरों के आईएएस बनने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने आदेश जारी करके यह बड़ी राहत दी। इनकी प्रमोशन हाईकोर्ट में कुछ अन्य अफसरों की लंबित याचिका के चलते रुक गई थी।
जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस रामेंद्र जैन की खंडपीठ ने रोहतक की हुडा इस्टेट आफिसर सुनीता वर्मा की अर्जी पर दिए अपने फैसले में कहा कि जिन अफसरों को 2011 में यूपीएससी प्रमोशन के लिए क्लीन चिट दे चुका है और जो हाईकोर्ट में लंबित सीनियोरिटी संबंधी मामले में भी पार्टी नहीं हैं, उन अफसरों को प्रमोशन पर स्टे के कारण परेशान क्यों किया जा रहा है?
सुनीता वर्मा ने अपनी अर्जी में हाईकोर्ट को बताया था कि वे आगामी जनवरी माह में रिटायर हो रही हैं और हाईकोर्ट में प्रमोशन को लेकर सीनियोरिटी से संबंधी मामले में वे किसी भी रूप में पार्टी नहीं है। उन्हें 2011 में यूपीएससी से प्रमोशन के लिए मंजूरी दी जा चुकी है, लेकिन हाईकोर्ट के स्टे के कारण उनका प्रमोशन भी रुक गया है।
कोर्ट में उपस्थित हरियाणा के एडीजी अमर विवेक ने बताया कि ऐसे 9 अफसर हैं, जिन्हें यूपीएससी से क्लीन चिट मिल चुकी है, लेकिन 2015 में प्रमोशन पर लगाई गई रोक के चलते सरकार ने उन्हें प्रमोट नहीं किया है। उन्होंने इन एचसीएस अधिकारियों के नाम भी हाईकोर्ट को दिए, जो इस प्रकार हैं- हरदीप सिंह, रमेश चंद बेदन, मोहिंदर सिंह यादव, सुमेधा कटारिया, भूपेंद्र सिंह, सुनिता वर्मा, सुलतान सिंह घोसवाल, गीता भारती व पंकज चौधरी।
खंडपीठ ने शुकवार को इन नौ अफसरों की प्रमोशन के बारे में सरकार को तुरंत विचार करने के आदेश जारी कर दिए। फिलहाल बाकी पूरे मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।