हाईकोर्ट ने जाट आरक्षण पर लगाई रोक
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में राज्य सरकार द्वारा जाटों समेत छह जातियों को नौकरी और शैक्षिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण दिए जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। वीरवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई तय कर दी। हरियाणा सरकार ने इस साल विधानसभा में विधेयक पारित कर प्रदेश में जाटों के अलावा जट सिख, रोड, बिश्नोई, त्यागी और मुस्लिम जाटों को आरक्षण की सुविधा प्रदान की थी।
इस विधेयक को राज्यपाल द्वारा मंजूरी के बाद इसी महीने सरकार ने इस कानून को लागू करने संबंधी अधिसूचना भी जारी कर दी थी। भिवानी निवासी मुरारी लाल की याचिका जिसे हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया है, पर वीरवार को जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए जाटों समेत छह जातियों को हरियाणा में दी गई आरक्षण की सुविधा पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। मुरारी लाल ने याचिका दायर कर हरियाणा में जाटों को आरक्षण दिए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
19 मई को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस लीसा गिल की बेंच ने याचिका को निजी न मानते हुए जनहित में माना और जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए एक्टिंग चीफ जस्टिस के पास रैफर कर दिया, जिन्होंने ने इस याचिका को जनहित में सुने जाने के लिए जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच को सौंप दिया। वीरवार को इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने हरियाणा सरकार द्वारा जाटों को आरक्षण देने के लिए बनाए एक्ट की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कोर्ट को बताया कि हरियाणा विधानसभा ने गत 29 मार्च को सर्वसम्मति से हरियाणा बैकवर्ड क्लासेस (रिजर्वेशन इन सर्विस एंड एडमिशन इन एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस) एक्ट- 2016 को मंजूरी देते हुए जाटों समेत छह जातियों को पिछड़ा वर्ग (सी) कैटेगरी में आरक्षण देने का प्रावधान किया था।
याचिका में कहा गया कि हरियाणा सरकार ने जाटों समेत छह जातियों को आरक्षण देने के लिए जस्टिस केसी गुप्ता की उस रिपोर्ट को एक्ट का आधार बनाया, जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही सिरे से खारिज कर चुका है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा सरकार द्वारा फिर से आरक्षण लागू करना असंवैधानिक है। याचिका में यह भी कहा गया कि जाटों को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में पहले से प्रतिनिधित्व मिल रहा है और जाट ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार ने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में हरियाणा के जाटों सहित पांच अन्य जातियों को विशेष पिछड़े वर्ग के तहत आरक्षण देने का प्रावधान किया है।
इस आरक्षण के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका में में बताया गया है की राज्य सरकार ने यह आरक्षण सेवानिवृत जस्टिस के.सी. गुप्ता आयोग की सिफारिश के आधार पर तय किया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस आयोग की सिफारिश को खारिज कर चूका है और जाटों को आरक्षण देने की इस नीति को रद्द कर चुका है। भारतीय सेना सहित सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में उनको पर्याप्त प्रतिनिधित्व है वह ऊँचे पदों पर पहले ही हैं लिहाजा ऐसे में उन्हें अलग से आरक्षण देना ठीक नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी।