हरियाणा में जाटों को आरक्षण का लाभ दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याची से बड़ा सवाल पूछ डाला। हाइकोर्ट ने सवाल किया कि यह आरक्षण संविधान के खिलाफ कैसे है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के इस सवाल पर बुधवार को याची अपना पक्ष रखेगा।
मंगलवार को याचिकाकर्ता कुम्हार महासभा की ओर से सीनियर एडवोकेट वीके जिंदल ने दलीलें आरंभ करते हुए कहा कि जहां पर भी संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन कोई एक्ट करता हो, वहां उस एक्ट को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है और कोर्ट उसे खारिज कर सकता है।
इसके साथ ही जाटों को दिए गए आरक्षण को गलत करार देते हुए जिंदल ने कहा कि संविधान और सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न जजमेंट में यह साफ है कि यदि कोई वर्ग सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़ा हुआ होगा तो आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।
जाटों सहित 6 जातियों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा दिखाने के लिए हरियाणा सरकार ने कोई आंकड़े ही एकत्रित नहीं किए।