जसिया में धरने पर बैठे जाट समाज के लोग
- फोटो : amar ujala
हरियाणा में जाटों समेत छह जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग के रूप में नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण की सुविधा दिए जाने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई 20 जून तक टल गई।
शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस एम. जयपॉल और जस्टिस अमित रावल की वेकेशन बेंच के समक्ष होनी तय थी लेकिन जस्टिस अमित रावल ने यह कहते हुए याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया कि उन्होंने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा में हुई हिंसा पर संज्ञान लिया था।
जस्टिस अमित रावल ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करते हुए इस मामले की सुनवाई अन्य डिविजन बेंच समक्ष किए जाने का आग्रह किया। इसके बाद इस मामले की सुनवाई 20 जून तक स्थगित कर दी गई।
शुक्रवार को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान कई जाट नेता भी पहुंचे हुए थे, जिन्होंने पत्रकारों से बातचीत में आरक्षण पर लगी रोक के लिए हरियाणा सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उल्लेखनीय है कि आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट पहले ही जाटों सहित छह जातियों को दिए आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा चुका है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ हरियाणा सरकार ने एक अरजी दाखिल कर रोक हटाए जाने की मांग भी की है। इस अरजी पर मुख्य याचिका के साथ ही सुनवाई होनी है। इस मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य याचिका पर बहस से पहले सरकार की अरजी पर विचार करने से इंकार कर दिया था।
अरजी में हरियाणा सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट ने सरकार का पक्ष सुने बिना ही आरक्षण पर रोक लगाई है। सरकार का यह भी कहना है कि आरक्षण पर रोक लागू रही तो प्रदेश में बड़े पैमाने में सरकारी पदों पर होने वाली भरती और शिक्षण संस्थानों में दाखिले प्रभावित होंगे।