Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोपी शिक्षक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत पर निर्णय लेते समय व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाज का हित दोनों के बीच संतुलन जरूरी है।
पटियाला के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक धनवीर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए यौन उत्पीड़न मामले में अग्रिम जमानत की मांग की थी। याची पर आरोप है कि उसने 10वीं कक्षा की छात्रा का यौन उत्पीड़न किया। जब छात्रा को स्कूल में डांस की प्रैक्टिस के लिए बुलाया गया था तो अकेला पाकर याची उसे स्पोर्ट्स रूम में ले गया और उसका यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद शिक्षक के खिलाफ आईपीसी की धारा 334 व पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
याची ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को याचिका में नकारा है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जमानत पर फैसला सुनाते हुए व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाज हित दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है। जहां बात समाज हित की हो वहां पर उसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर स्थान मिलेगा। यदि इस मामले में शिक्षक को जमानत दी गई तो हो सकता है वह सबूतों से छेड़छाड़ का प्रयास करे या फिर भगोड़ा हो जाए। ऐसे में शिक्षक को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने शिक्षक की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।