देशद्रोह मामले के जेल में कैद रामपाल अंतरिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा बयान दिया है। हाईकोर्ट ने इंटेलिजेंस रिपोर्ट और ट्रायल के दौरान समर्थकों के रवैए को आधार बनाते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि वे चाहते थे कि रामपाल अपनी मां की अंतिम क्रिया में शामिल हो। लेकिन जिस प्रकार से रिपोर्ट मिली है, उसके बाद ऐसा संभव नहीं है कि उसे कोई राहत दी जाए। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा के डीजीपी व सोनीपत के एसपी हाईकोर्ट में हाजिर हुए।
कोर्ट ने दोनों से पूछा कि आखिर क्यों रामपाल को पुलिस की सुरक्षा में उसकी मां के पाठ में शामिल होने देने की इजाजत देने में उन्हें एतराज है। इस पर दोनों की ओर से बताया गया कि उनके पास इंटेलिजेंस से कुछ इनपुट आई है।
इनपुट को वे कोर्ट में नहीं दिखा सकते हैं। चैंबर में ही यह बेंच को दिखाई जा सकती है। इस पर बेंच के दोनों जज डीजीपी के साथ चैंबर में चले गए। चैंबर से वापस आने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया और इसे अंत में सुनाने का फैसला लिया।
इसके बाद करीब साढ़े चार बजे बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि रामपाल को राहत नहीं दी जा सकती है। उसकी याचिका को खारिज किया जाता है।
समर्थकों का रवैया देखते हुए नहीं जमानत संभव नहीं
संत रामपाल
हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत आदेशों में कहा कि याची द्वारा तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी गई थी और इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार ने उस पर चल रहे मामलों के ट्रायल के दौरान उसके अनुयायियों की भीड़ का जिक्र किया। इसके साथ ही राज्य सरकार ने पाठ के स्थान को बदलने की भी बात कही।
बेंच ने कहा कि रामपाल कोई आतंकी नहीं है, लेकिन जिस प्रकार उसके समर्थकों का रवैया उसे देखने के बाद होता है उससे हाईकोर्ट के लिए यह संभव नहीं है कि उसे जमानत का लाभ दिया जाए। इससे पहले हरियाणा सरकार ने रामपाल की अंतरिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा था कि रामपाल के देश के कई राज्यों में हजारों समर्थक हैं।
जेल में रामपाल के खिलाफ चल रहे ट्रायल की विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान भी जेल के बाह रामपाल के हजारों समर्थक इकट्ठा हो जाते हैं। कानून व्यवस्था बनाये रखना मुश्किल हो जाता है और आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रामपाल के समर्थकों को काबू करना होगा मुश्किल
रामपाल की पेशी के दौरान उमड़े समर्थक
- फोटो : अमर उजाला
डीजीपी ने कहा कि अगर रामपाल को उसकी मां के अंतिम पाठ में शामिल होने की इजाजत दी गई और वहां उसके समर्थक एकत्रित हो गए तो सुरक्षा के प्रबंध के बावजूद हजारों समर्थकों को संभालना मुश्किल हो जाएगा।
ऐसे में लाठी चार्ज व अन्य तरीके भी शायद नाकाफी साबित हों। रामपाल के अनुयायियों के एक लंबे समय से रामपाल को नहीं देखा है ऐसे में उसके अनुयायी उसकी एक झलक के लिए हिंसक हो सकते हैं। ऐसे में रामपाल को इसकी इजाजत न देना ही जनहित में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए जरूरी है।