अगर आप पासपोर्ट बनवाने की सोच रहे हैं तो पढ़ लिजिए बड़े काम की ये खबर। एनओसी को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फरमान सुनाया है। पासपोर्ट के लिए एनओसी जारी करते समय अब पुलिस को चालान में कॉलम संख्या का ध्यान रखना होगा।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह आदेश सुनाते हुए कहा कि चालान की कॉलम संख्या 2 में आवेदक का नाम होने पर उसे पासपोर्ट के लिए एनओसी जारी की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जारी करने के लिए इन आदेशों का इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन देश से बाहर जाने के लिए नहीं किया जा सकता है।
इसके लिए आवेदक को ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। हाईकोर्ट के यह आदेश देश भर में पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वालों के लिए अहम हैं। मामले में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया था कि याचिकाकर्ता ने अपने पासपोर्ट को रिन्यू करने के लिए आवेदन किया था। उसके आवेदन पर एनओसी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया गया कि उस पर एफआईआर दर्ज है और चालान में भी याची का नाम है।
कोर्ट चालान की कॉलम संख्या 2 में है नाम तो जारी हो सकती है एनओसी
पासपोर्ट
याची ने कहा कि उनका नाम चालान की कॉलम संख्या 2 में है और ऐसे में वह ट्रायल भी नहीं फेस कर रहा। याची की दलीलों का विरोध करते हुए केंद्र सरकार और पुलिस की ओर से कहा गया कि याची ने इस एफआईआर का आवेदन में जिक्र नहीं किया।
साथ ही उसे ट्रायल कोर्ट में समन करने के लिए एक अर्जी भी दाखिल की गई है, जिस पर जून में सुनवाई होनी है। ऐसे में पासपोर्ट के लिए एनओसी नहीं दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले का निपटारा करते हुए कहा कि पासपोर्ट के लिए आवेदन पर एनओसी देने से तब इनकार नहीं किया जा सकता है, जब चालान की कॉलम संख्या 2 में आवेदक का नाम हो।
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जारी करने को एनओसी के लिए ही इन आदेशों का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि याची को विदेश जाना है, तो इसके लिए उसे पहले ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।
चालान के कॉलम नंबर 2 पुलिस की जांच में निर्दोष पाए गए आरोपी
हाईकोर्ट
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस चालान पेश करते हुए उनकी जांच में दोषी पाए जाने वालों को चालान की कॉलम संख्या एक में रखती है। कॉलम संख्या 2 में ऐसे आरोपियों को रखा जाता है, जो पुलिस की जांच में निर्दोष पाए गए हों।
कॉलम नंबर 2 में जिन आरोपियों का नाम रखा जाता है, उन्हें ट्रायल का सामना नहीं करना पड़ता है। हालांकि ,यह मजिस्ट्रेट पर निर्भर करता है कि आरोपियों को चालान के कालम 2 में रखने के पुलिस के फैसले को मानते हैं या फिर आरोपियों का नाम कॉलम नंबर एक में रखने के आदेश जारी कर देते हैं।