फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने स्वीकार की सजा के खिलाफ राम रहीम की अपील, CBI को नोटिस

Tue, 10 Oct 2017 09:13 AM IST
विवेक शुक्ला/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
Gurmeet Ram Rahim Singh
विज्ञापन
साध्वी रेप केस में 20 साल की सजा के खिलाफ राम रहीम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जो स्वीकार कर ली गई है और सीबीआई को नोटिस दे दिया गया है। राम रहीम ने याचिका दाखिल करते हुए सजा रद्द करने की मांग की है।
विज्ञापन


डेरामुखी की अपील रजिस्ट्री से क्लीयर हो गई थी और इस पर सोमवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान डेरा प्रमुख के वकील की तरफ से जुर्माने की राशि पर रोक की अंतरिम राहत देने की भी मांग की गई। कोर्ट ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए जुर्माने व मुआवजे की 30 लाख की राशि सीबीआई कोर्ट में जमा करवाने को कहा है।

इसके अलावा यौन शोषण का शिकार उन दो साध्वियों ने भी हाईकोर्ट में अपील दायर की थी कि डेरा प्रमुख की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील किया जाए। इसे भी हाईकोर्ट ने एडमिट करते हुए सीबीआइ को नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

राम रहीम ने अपनी दलील में ये सब कहा

राम रहीम - फोटो : self
राम-रहीम ने सीनियर एडवोकेट एसके गर्ग नरवाना के जरिये हाईकोर्ट में अपील दायर कर कहा है कि इस मामले में सीबीआई अदालत ने बिना उचित साक्ष्यों और गवाहों के उसको दोषी ठहरा सजा सुना दी है जो कानूनी प्रक्रिया के अनुसार गलत है। डेरामुखी ने कहा कि पहले इस मामले में एफआईआर ही 2-3 वर्षों की देरी से दायर हुई और वो भी एक गुमनाम शिकायत पर, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम तक नहीं था।

पीड़िता के बयान ही छह वर्षों के बाद रिकॉर्ड किए गए। सीबीआई का कहना था कि वर्ष 1999 में यौन शोषण हुआ था, लेकिन बयान वर्ष 2005 में दर्ज किए गए। जब सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की, तब कोई शिकायतकर्ता ही नहीं था। डेरा मुखी की अपील में सवाल उठाया गया है कि सीबीआई का यह कहना की पीड़िताओं पर कोई दबाव नहीं था गलत है, क्योंकि दोनों पीड़िता सीबीआई के संरक्षण में थीं। ऐसे में प्रॉसिक्यूशन का उन पर दबाव था। 30 जुलाई 2007 तक बिना किसी शिकायत के जांच की जाती रही और पूरी की गई।

राम रहीम का कहना है कि उसके पक्ष के साक्ष्य और गवाहों पर सीबीआई अदालत ने गौर ही नहीं किया। यहां तक कि सीबीआई ने डेरामुखी के मेडिकल एग्जामिनेशन तक की जरूरत नहीं समझी। इसलिए राम रहीम के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, वे सही भी हो सकते हैं या नहीं लिहाजा इन सभी आधारों को लेकर डेरा मुखी ने सजा को रद्द कर उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को ख़ारिज किये जाने की हाईकोर्ट से मांग की है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें