प्रमोशन देकर जेई बनाने और 11 दिन बाद अयोग्य बता डिमोट करने के मामले में हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए इस बारे में स्पष्टीकरण के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के मुख्य प्रशासक को तलब कर लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए नरेंद्र कुमार ने बताया कि वह एचएसवीपी में कार्यरत है और उसे 18 जुलाई, 2022 को जूनियर इंजीनियर के तौर पर पदोन्नत किया गया था। याची ने बताया कि अचानक 28 जुलाई को पत्र जारी कर उसकी पदोन्नति के आदेश को रद्द कर दिया गया। याची ने बताया कि पत्र में केवल इतना लिखा था कि याची इस पद के लिए योग्यता मानकों को पूरा नहीं करता।
याची ने कहा कि नियमों के अनुसार वह इस पद पर पदोन्नति के लिए पूरी तरह से योग्य है। इस पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए हरियाणा सरकार व एचएसवीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक को अगली सुनवाई पर कोर्ट में हाजिर रहने का आदेश दिया है। कोर्ट में उन्हें बताना होगा कि यदि याची योग्य नहीं था तो उसे पदोन्नत क्यों किया गया। साथ ही यह भी बताना होगा कि यदि याची अयोग्य है तो उसके कारण पदोन्नति रद्द करने के आदेश में क्यों नहीं लिखे गए।