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हाईकोर्ट का आदेश: वयस्क आश्रितों को मुआवजा जारी करते हुए ट्रिब्यूनल बेवजह के सवाल न करे

Sat, 13 Nov 2021 02:25 PM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अंबाला निवासी युवती ने याचिका दाखिल कर कहा था कि उसके माता पिता की मौत के बाद उसे मुआवजे के तौर पर मिली राशि की एफडी करवाई गई थी। अब उसे बाहर पढ़ने जाना है तो ट्रिब्यूनल कोर्ट ने उसकी अर्जी अस्वीकार कर दी है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के उस फैसले को खारिज कर दिया है जिसमें मृतक के आश्रितों के पास विदेश में पढ़ाई के लिए जाने का सबूत न होने के चलते एफडी में रखे उनके पैसे जारी करने से इनकार कर दिया गया था।

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याचिका दाखिल करते हुए अंबाला निवासी शिवानी पंचाल ने बताया कि उसके माता-पिता की मौत 19 नवंबर 2017 को वाहन दुर्घटना में हो गई थी। इसके बाद मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 10 मई 2019 को पिता की मौत के लिए 1310448 तथा मां की मौत के लिए 1642800 रुपये मुआवजा तय किया था।
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याची तब 18 वर्ष से कम की आयु की थी तो ट्रिब्यूनल ने इस राशि को 5 वर्ष के लिए या उसके वयस्क होने तक एफडी के तौर पर रखने का आदेश दिया था। याची ने बताया कि अब वह 18 वर्ष से ऊपर की है और विदेश जाकर पढ़ाई करने के लिए उसने मुआवजा राशि जारी करने के लिए अर्जी दाखिल की थी। लेकिन ट्रिब्यूनल कोर्ट ने उसकी अर्जी यह कहते हुए अस्वीकार कर दी कि याची ने पासपोर्ट, वीजा और कोर्स की जानकारी, उसकी फीस व कॉलेज का नाम नहीं बताया है। 

हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आश्रित अब वयस्क हो चुकी है और ऐसे में उसे इस राशि का क्या करना है, यह उसे खुद तय करना है। इस तरह के मामलों में बेवजह के सवालों से ट्रिब्यूनल को बचना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याची को मुआवजा राशि जारी करने का आदेश दिया है।

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