पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि जघन्य अपराध की स्थिति में समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती है। मामला भले ही जीजा साले के बीच का क्यों न हो, इस मामले में हत्या के प्रयास का आरोप है और याची पर 6 अन्य मामले दर्ज हैं ऐसे में राहत नहीं दी जा सकती।
सोनीपत निवासी प्रदीप कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए शिकायतकर्ता से समझौते के आधार पर याची के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने सोनीपत पुलिस को बताया था कि उसकी बहन का विवाह प्रदीप कुमार से हुआ था। इसके बाद याची का जीजा असामाजिक तत्वों के संपर्क में आ गया था और आपराधिक मामले में दो साल जेल काट कर आया था। जेल से वापस आने के बाद वह शराब के ठेकेदारों के संपर्क में रहने लगा और शिकायतकर्ता उसके पास नौकरी करने लगा। इस दौरान अक्सर वह शिकायतकर्ता को पीटता था जिसके चलते वह नौकरी छोड़कर घर आ गया।
6 सितंबर 2022 को याची शिकायतकर्ता के समालखा स्थित घर पर रात को पहुंचा और वापस आने के लिए धमकी दी। इस दौरान उसने कई गोलियां दागी और शिकायतकर्ता ने दीवार के पीछे छिप कर जान बचाई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली।
याची ने कहा कि अब उसका शिकायतकर्ता के साथ समझौता हो गया है। दोनों रिश्तेदार हैं और कुछ ही दूरी पर शांति से रह रहे हैं। दोनों के बीच समझौता हो गया है और ऐसे में एफआईआर रद्द की जाए। हरियाणा सरकार ने याचिका का विरोध किया और कहा कि याची आदतन अपराधी है ऐसे में एफआईआर रद्द नहीं होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि याची के खिलाफ 6 अन्य मामले दर्ज हैं और यह मामला हत्या के प्रयास का है जो समाज के प्रति जघन्य अपराध है। ऐसे में इन तथ्यों को देखने के बाद एफआईआर रद्द करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।