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High Court News: 16 साल की मुस्लिम लड़की को पति संग रहने के लिए दें सुरक्षा, हाईकोर्ट ने एसएसपी को दिए आदेश

Mon, 20 Jun 2022 11:57 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिमों का विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ के अधीन होता है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति जो यौन परिपक्वता प्राप्त कर लेता है, वह निकाह के योग्य माना जाता है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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परिजनों की मर्जी के बिना विवाह करने वाले जोड़े की सुरक्षा से जुड़ी याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है। हाईकोर्ट ने पठानकोट के एसएसपी को आदेश दिया है कि 16 साल की लड़की को पति संग रहने के लिए सुरक्षा मुहैया करवाएं। 

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याचिका दाखिल करते हुए दंपती ने बताया कि उन्होंने अपने घर वालों की मर्जी के बगैर विवाह किया है। दोनों ने मुस्लिम धर्म की रस्मों को पूरा करते हुए विवाह किया है। लड़के की आयु 22 साल है वहीं लड़की की आयु 16 वर्ष है। याची ने कहा कि मुस्लिम धर्म में यौन परिपक्वता पाने के बाद लड़का और लड़की दोनों का विवाह वैध माना जाता है। ऐसे में दोनों का विवाह वैध है और उन्हें सुरक्षा दी जाए। याची ने बताया कि उन्होंने पठानकोट के एसएसपी से भी सुरक्षा के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिमों का विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ के अधीन होता है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति जो यौन परिपक्वता प्राप्त कर लेता है, वह निकाह के योग्य माना जाता है। साथ ही यह भी स्पष्टीकरण है कि यदि सुबूत मौजूद नहीं है तो 15 वर्ष की आयु को निकाह योग्य माना जाता है। साथ ही कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा का अधिकार है। कोर्ट ने पठानकोट के एसएसपी को याची दंपती की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। 

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