बुधवार की सुबह हाईकोर्ट द्वारा चुनाव की घोषणा पर रोक लगाने का आदेश चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आपत्ति जताने पर दोपहर में वापस ले लिया गया। प्रशासन ने कहा कि वह 19 नवंबर को चुनाव की घोषणा करन चाहते हैं जिस पर हाईकोर्ट ने मुख्य याचिका पर 18 नवंबर को सुनवाई करने का फैसला ले लिया।
शिरोमणि अकाली दल के महासचिव शिव कुमार व आम आदमी पार्टी के नेता शकील मोहम्मद ने चंडीगढ़ निगम चुनाव के लिए वार्ड आरक्षित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याची ने बताया कि 2011 से 2021 के बीच कई कॉलोनियों को तोड़ा व हटाया गया है। कई कॉलोनियां ऐसी हैं जो अस्तित्व में ही नहीं है। वार्ड आरक्षित करते हुए ऐसी कालोनियों की जनसंख्या को आधार बनाया गया है।
याची ने इस संबंध में आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी थी कि एरिया के अनुसार वार्ड की जनसंख्या की जानकारी दी जाए। जवाब में वार्ड के अनुसार जानकारी दी गई। याची ने सवाल उठाया कि 2011 की जनसंख्या को आधार बनाकर कैसे वार्ड आरक्षित किए जा सकते हैं। याची ने कहा कि वार्ड 7, 16, 19, 24, 26, 28 व 31 को इसी प्रकार आरक्षित रखने का फैसला लिया गया है।
हाईकोर्ट से अपील की गई कि वार्ड आरक्षित करने के चुनाव आयोग के 19 अक्तूबर के फैसले को खारिज किया जाए। साथ ही आरक्षण के लिए जनगणना को ध्यान में रखते हुए जो कॉलोनी मौजूद नहीं है, उनकी जनसंख्या को हटाकर देखा जाए कि वार्ड आरक्षित होना है या नहीं। साथ ही याचिका लंबित रहते वार्ड आरक्षित करने के फैसले पर रोक लगाई जाए। याचिका पर 23 नवंबर को सुनवाई होनी थी। याची ने अर्जी दाखिल कर कहा कि चुनाव आयोग इससे पहले चुनाव घोषित कर सकता है, ऐसे में याचिका पर जल्द सुनवाई हो। इस पर हाईकोर्ट ने बुधवार की सुबह चुनाव आयोग को आदेश दिया कि 23 नवंबर तक चुनाव घोषित न किए जाएं। इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन के वकील ने इस रोक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह 19 नवंबर को चुनाव की घोषणा करना चाहते हैं। हाईकोर्ट ने इस पर रोक का आदेश हटाते हुए सुनवाई को 18 नवंबर को करने का निर्णय लिया है।
बबला की अर्जी पर केस में किया शामिल
इसके साथ ही बुधवार को सुनवाई के दौरान कांग्रेस पार्षद व नगर निगम में विपक्ष के नेता देवेंदर सिंह बबला ने भी पक्ष बनने की अर्जी दाखिल की। हाईकोर्ट ने अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें केस में शामिल कर लिया।