सिखों के विवाह समारोह से जुड़े आनंद कारज को किसने लिखा है, इस विवाद के निपटारे की जिम्मेदारी विशेषज्ञ कमेटी को सौंपते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़ी एक याचिका का निपटारा कर दिया।
याचिका दाखिल करते हुए होशियारपुर निवासी प्रभजोत कौर व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने 2017 में बेसिक प्रोफिसिएंसी टेस्ट दिया था ताकि प्रमोशन के लिए लोवर स्कूल कोर्स के लिए जा सकें। परीक्षा में प्रश्नों में से एक यह भी था कि सिखों के विवाह की रस्मों के रूप में आनंद कारज किसने लिखी है। याची ने बताया कि उन्होंने गुरु रामदास उत्तर दिया लेकिन उसको गलत बताया गया। ऐसे में उन्हें प्रमोशन के लिए अयोग्य बताते हुए वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया।
याची ने कहा कि आनंद साहिब गुरु अमरदास ने लिखी थी लेकिन लावण गुरु रामदास जी ने लिखे थे। आनंद साहिब सभी शुभ अवसरों पर उपयोग में लाई जाती है जबकि लावण केवल विवाह समारोह के लिए होते हैं। यदि याचिकाकर्ताओं को इस प्रश्न के लिए अंक मिल जाता है तो वे प्रमोशन के लिए योग्य घोषित हो जाएंगे।
कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि अदालत इस विषय की विशेषज्ञ नहीं है। वैसे में परीक्षा के मामले में एक्सपर्ट को ही बेहतर सलाह देने वाला माना जा सकता है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को एक विशेषज्ञ कमेटी गठित करने के बाद यह तय करने का आदेश दिया है कि आनंद कारज किसने लिखी है। इसको निर्धारित करने के बाद याचिकाकर्ताओं को लेकर सरकार को निर्णय लेने का आदेश दिया है।