हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस तरह के मामलों को लेकर यह स्पष्ट कर चुका है कि क्षेत्राधिकार के बाहर की अदालतों के आदेश का सम्मान किया जाए, ताकि आदेशों के बीच टकराव न हो। हालांकि कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों को लेकर कोई निश्चित कानून नहीं है और हर मामले की परिस्थिति के अनुरूप उस पर निर्णय लेना आवश्यक है।
हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ की जिला अदालतों में हो सकेगी सभी तरह के मामलों की फाइलिंग
पिता का पक्ष सुनना जरूरी
याचिकाकर्ता एक सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, ऐसे में वह कैसे कस्टडी में लेकर साढे़ चार साल के बच्चे का ध्यान रख सकता है? इसको लेकर पिता का पक्ष सुनना जरूरी है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ता को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनने का निर्णय लेते हुए सभी प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता का पक्ष सुना जाए तो बच्चे की मां भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।