फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सॉफ्टवेयर इंजीनियर को मिल गई साढ़े चार साल के बेटे से बात करने की इजाजत, जानिए मामला

Fri, 12 Jun 2020 11:02 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • हरियाणा के गुरुग्राम जिले में मां के साथ रहता है बेटा
  • पिता फराहत ने यूएसए से लगाई थी हाईकोर्ट से गुहार
  • यूएसए की अदालत से मिल चुकी है बेटे की कस्टडी
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गुरुग्राम में रह रहे अपने साढे़ चार साल के बेटे से बात करने के लिए एक पिता ने यूएसए से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में गुहार लगाई। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हर दूसरे दिन पिता को बेटे से बात करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अगली सुनवाई पर पिता को यह बताने के आदेश दिए हैं कि वह कैसे अपनी नौकरी के साथ इस छोटे बच्चे का ख्याल रख सकता है।
विज्ञापन


नैतिकता के पतन का मामला नहीं बना तो कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त नहीं कर सकते: हाईकोर्ट

याचिका दाखिल करते हुए बच्चे के पिता फराहत ने हाईकोर्ट को बताया कि यूएसए की अदालत ने फरवरी 2020 में फैसला सुनाते हुए साढे़ चार साल के बेटे आदित्य की कस्टडी उसको सौंपने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि लॉकडाउन के चलते वह फिजिकल तौर पर कस्टडी अपने पास नहीं ले पाया।
विज्ञापन


वर्तमान में बेटे आदित्य की कस्टडी उसकी मां वसुधा सेठी के पास है। याचिकाकर्ता ने अपील की कि जब तक इस मामले से जुड़ा विवाद समाप्त नहीं हो जाता, तब तक एक दिन छोड़कर उसे बेटे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करने की अनुमति दी जाए, ताकि उनके बीच का जुड़ाव खत्म न हो।
विज्ञापन

परिस्थिति के अनुरूप उस पर निर्णय लेना आवश्यक

हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस तरह के मामलों को लेकर यह स्पष्ट कर चुका है कि क्षेत्राधिकार के बाहर की अदालतों के आदेश का सम्मान किया जाए, ताकि आदेशों के बीच टकराव न हो। हालांकि कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों को लेकर कोई निश्चित कानून नहीं है और हर मामले की परिस्थिति के अनुरूप उस पर निर्णय लेना आवश्यक है।

हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ की जिला अदालतों में हो सकेगी सभी तरह के मामलों की फाइलिंग
 
पिता का पक्ष सुनना जरूरी
याचिकाकर्ता एक सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, ऐसे में वह कैसे कस्टडी में लेकर साढे़ चार साल के बच्चे का ध्यान रख सकता है? इसको लेकर पिता का पक्ष सुनना जरूरी है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ता को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनने का निर्णय लेते हुए सभी प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता का पक्ष सुना जाए तो बच्चे की मां भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें