हत्या के प्रयास के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपियों की अपील पर सुनवाई करते हुए पांच में से तीन आरोपियों की अपील खारिज कर दी और दो को निर्दोष मानते हुए बरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दो ने हमला नहीं किया इसका मतलब यह नहीं कि बाकी तीन निर्दोष हैं। भारत की अदालतों में आंशिक असत्य का मतलब पूर्ण असत्य नहीं है। कोर्ट का काम भूसे से अनाज और असत्य से सत्य अलग करने का है।
सफीदों निवासी बलबीर सिंह, अमनदीप सिंह, रमनदीप सिंह, मंजीत सिंह व नरोत्तम सिंह ने हत्या के प्रयास के मामले में उन्हें 5 नवंबर 2007 को जींद के सेशन जज द्वारा सुनाई गई पांच साल कैद की सजा को चुनौती दी थी। 22 मई 2005 को शिकायतकर्ता गुरपिंदर सिंह अपने बाड़े (पशु बांधने का स्थान) से बाहर निकला तो याचिकाकर्ताओं ने उस पर हमला कर दिया। इस दौरान तेजधार हथियारों से हुए हमले के चलते वह बुरी तरह घायल हो गया। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया।
जींद की सेशन कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने बलबीर सिंह, मंजीत सिंह व नरोत्तम के खिलाफ पर्याप्त सबूत पाते हुए उन्हें दोषी माना। अमनदीप सिंह व रमनदीप सिंह के खिलाफ कोर्ट ने पाया कि पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रत्यक्षदर्शी ने पांच लोगों का नाम लिया था। इनमें से दो को कोर्ट दोषी नहीं मानता इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी तीन निर्दोष हैं। कोर्ट ने कहा कि भारत की अदालतों में आंशिक असत्य का मतलब पूर्ण असत्य नहीं है। कोर्ट का काम भूसे से अनाज और झूठ से सत्य अलग करने का है। कोर्ट ने अमनदीप व रमनदीप को बरी करने का आदेश दिया जबकि बाकी के तीनों की सजा को बरकरार रखा है।