पंजाब सरकार ने निजी कंपनियों को बीच में लाकर उचित मूल्य की दुकानों को बायपास किया है। याचिका में पंजाब सरकार की इस योजना को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि पंजाब में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से छेड़छाड़ न करने का पंजाब सरकार को आदेश दिया जाए। सिंगल बेंच ने योजना पर रोक लगाते हुए पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया था।
रोक के खिलाफ पंजाब सरकार खंडपीठ के समक्ष पहुंची थी। खंडपीठ ने सिंगल बेंच को आदेश पर फिर से विचार करने को कहा था। सिंगल बेंच ने अब रोक को हटाते हुए याचिका खंडपीठ को रेफर कर दी थी। खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस योजना के तहत तीसरे पक्ष को लाभ देने पर रोक लगा दी थी। अब योजना में संशोधन की पंजाब सरकार द्वारा दी गई जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
17000 उचित मूल्य की दुकानों को किया जा रहा बायपास
याचिका में बताया गया कि पंजाब में 17000 उचित मूल्य की दुकानों का नेटवर्क मौजूद है। इस नेटवर्क के इस्तेमाल के स्थान पर आटा लोगों के घरों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। याची ने बताया कि केंद्र सरकार ने तीन नवंबर 2014 को सर्कुलर जारी कर राज्यों को कहा था कि खाद्य सामग्री का वितरण टार्गेट पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम के नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा। इसके बावजूद पंजाब सरकार नेटवर्क से बाहर जाकर काम कर रही है।
दिल्ली में इस योजना का टेंडर हो चुका है खारिज
पंजाब में घर-घर राशन की स्कीम से पहले आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे दिल्ली में लागू करने की योजना बनाई थी। दिल्ली सरकार ने इसके लिए टेंडर भी जारी किया था। टेंडर की प्रक्रिया को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने तब इस टेंडर प्रक्रिया को खारिज कर दिया था। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट की जजमेंट के आधार पर पंजाब सरकार द्वारा जारी टेंडर प्रक्रिया को खारिज करने की हाईकोर्ट से अपील की गई है।