सीमा सुरक्षा बल की आंख और कान बनकर सहयोग करें नागरिक
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने पंजाब के 6 सीमावर्ती जिलों का दौरा किया। उन्हें लगता है कि इन्हीं जिलों के लोग हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमा के प्रहरी हैं। इनको सीमा सुरक्षा बल का सहयोग करना चाहिए। राज्यपाल ने सरपंचों और प्रबुद्ध लोगों से सीमा सुरक्षा बलों की ‘आंखें और कान’ बनकर पूर्ण सहयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पंजाब की सीमा पर ड्रोन से हथियार और गोला-बारूद गिराने की पिछली घटनाओं के कारण सभी संबंधित पक्षों को सतर्क रहने की जरूरत है। सुरक्षा बल अपना काम कर रहे हैं लेकिन स्थानीय तौर पर उपलब्ध खुफिया जानकारी और सहयोग राज्य में हथियारों और नशीले पदार्थों की आमद को रोकने में काफी सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
सीमाओं से प्रवेश कर कॉलेजों और स्कूलों में पहुंचते हैं नशीले पदार्थ
राज्यपाल ने कहा कि सीमाओं के रास्ते देश में प्रवेश करने वाले नशीले पदार्थ शहरों, कस्बों, स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचते हैं। युवाओं को नशीले पदार्थों की आपूर्ति हमारी भावी पीढ़ी और हमारे भविष्य पर सीधा हमला है। हम इस खतरे को अपने राज्य के वर्तमान को बर्बाद या इसके भविष्य से खिलवाड़ करने की अनुमति कतई नहीं दे सकते।
राज्यपाल ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा हर स्तर पर लोगों, राज्य सरकार की एजेंसियों और केंद्र सरकार की एजेंसियों के ठोस और निरंतर सहयोग से ही सुनिश्चित की जा सकती है। इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारुचक, मुख्य सचिव जेएम बाला मुरुगन, आईजी बार्डर रेंज मुनीष चावला, सुजानपुर विधायक नरेश पुरी, डीसी हरबीर सिंह, एसएसपी सुरेंद्र लांबा व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।