परगट सिंह ने कहा कि प्रवासी पंजाबियों की तरफ से पंजाब के इतिहास, विरासत, पंजाबी भाषा आदि के बारे अपने बच्चों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान जानकारी देने के लिए थोड़े समय के कोर्स करवाने की मांग को पूरा करते हुए पंजाब के विश्वविद्यालयों में थोड़े समय के समर स्कूल कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे नई पीढ़ी को पंजाब के सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से अवगत करवाया जा सके और उनको विरासत के नजदीक लाया जा सके। इसके अलावा राज्य के साथ जोड़ने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘होम स्टे’ की सुविधा शुरू की जाएगी।
परगट सिंह ने कहा कि पंजाब के सामाजिक, आर्थिक ढांचे के विकास में प्रवासी पंजाबियों का बहुत योगदान है। पंजाबियों ने सख्त मेहनत और उद्यमी गुणों के कारण दुनिया भर में यश अर्जित किया है। मौजूदा समय पंजाबियों की करीब तीसरी पीढ़ी विश्वभर में रह रही है। सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि नौजवान पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनी जड़ों से अलग हो रहे हैं।
ज्यादातर प्रवासी भारत में अपनी जायदाद सिर्फ इस कारण बेच रहे हैं, क्योंकि उनकी अगली पीढ़ी पंजाब में नहीं आना चाहती और वह अपने माता-पिता की जायदाद में भी रुचि नहीं रखते। जमीन की बिक्री न सिर्फ पंजाबियों को उनकी मां से छीन लेगी, बल्कि राज्य के सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर भी बुरा प्रभाव डालेगी।
यह हमारे लिए सोचने वाली बात है। इन कारणों की आलोचना और इसके हल के लिए उनसे संबंधित पक्षों के साथ विचार करके यह भावी रूपरेखा तैयार की गई है। इस मौके पर एनआरआई कमीशन सदस्य दलजीत सिंह सहोता, प्रवासी भारतीय मामलों संबंधी विभाग के सलाहकार सीए अश्वनी कुमार और गुरपाल सिंह उपस्थित रहे।