कार्यक्रम में बोलते सीएम भगवंत मान
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पंजाब सरकार राजधानी चंडीगढ़ समेत विभिन्न जिलों में निजी भवनों में चल रहे अपने दफ्तरों के लिए और किराया खर्च नहीं करेगी। यह फैसला वित्त विभाग द्वारा लिया गया है और नए वित्त वर्ष (एक अप्रैल) से इसे लागू भी किया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने नए बजट में, निजी भवनों में चल रहे दफ्तरों को किराये की मद में पैसा जारी नहीं करने के संकेत दे दिए हैं और विभाग ने भी ऐसे दफ्तरों को उनके सरकारी भवनों में शिफ्ट होने को कह दिया है। जिन स्थानों पर संबंधित दफ्तरों के विभागों के अपने भवन नहीं हैं, वहां ऐसे दफ्तरों को करीबी सरकारी इमारतों में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला उस समय वित्त मंत्री के ध्यान में आया जब आगामी बजट की तैयारियों के तहत विभागों का बजट बनाने के लिए उनके पिछले खर्च का अवलोकन शुरू किया गया। यह पाया गया कि अनेक विभागों के जिला, ब्लॉक व अन्य स्थानों पर दफ्तर निजी भवनों में चल रहे हैं और इनके लिए एक बड़ी रकम किराये के रूप में चुकाई जा रही है। ऐसे विभागों द्वारा कुल कितनी रकम किराये के तौर पर दी जा रही है, इसका आकलन जारी है लेकिन वित्त मंत्री के निर्देश पर वित्त विभाग ने इस मद में फंड देने से इनकार कर दिया है। विभागों को इस संबंध में निर्देश भी दिए गए हैं कि वह अपने दफ्तरों को सरकारी कार्यालयों में शिफ्ट करें। जिन विभागों के पास अपनी इमारतें नहीं हैं, वे सरकार को जानकारी दें ताकि उनके लिए सरकारी इमारतों में जगह की व्यवस्था की जा सके।
गौरतलब है कि पंजाब में पिछली कांग्रेस सरकार के समय भी सरकारी विभागों के इस खर्च को बचाने के उद्देश्य से राजधानी चंडीगढ़ में निजी भवनों, शोरूम आदि में चल रहे दफ्तरों को मोहाली स्थित संबंधित विभागों की इमारतों में शिफ्ट किया जा चुका है। बाकी दफ्तरों के लिए आप सरकार ने आगे कार्रवाई शुरू की है।