वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बीमा क्लेम नहीं देना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 76 हजार 921 रुपये बीमा क्लेम अदा करे। साथ ही बीमा क्लेम अदा करने वाली राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे। यह ब्याज 10 जून, 2019 से देना होगा जब क्लेम रद्द किया गया था। सात हजार रुपये मुआवजा और सात हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करना होगा।
शिकायतकर्ता सेक्टर 26 ट्रांसपोर्ट एरिया निवासी मैसर्स बांबे गुजरात रोडलाइंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनीष राणा ने सेक्टर 17 के यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के क्षेत्रीय कार्यालय और इसके सेक्टर 26-डी स्थित शाखा कार्यालय के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी थी।
शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में कहा था कि उनका वर्ष 1997 से ट्रांसपोर्ट का बिजनेस है। वह हरियाणा नंबर की एक गाड़ी के मालिक हैं जिसका यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस से बीमा कराया गया था। इसकी बीमा अवधि 28 फरवरी 2018 से 27 फरवरी 2019 तक थी। इसके लिए 51 हजार 18 रुपये का प्रीमियम भी भरा।
गुजरात के नवसारी में इस गाड़ी का 5 फरवरी 2019 को एक्सीडेंट हो गया था। दुर्घटना होने के बाद इस संबंध में बीमा कंपनी को सूचित किया। बीमा कंपनी ने एक सर्वेयर नियुक्त किया। सर्वेयर ने दुर्घटना के बाद गाड़ी के नुकसान का अनुमान 79 हजार 921 रुपये का लगाया। लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहकर क्लेम को रद्द कर दिया कि लाइसेंस वैध नहीं था।
बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सेवा में कोताही नहीं की है।