पंजाब सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि सेना को पाकिस्तान सीमा से सटी छह साइटों पर खनन होने से कोई आपत्ति नहीं है, इसलिए उसे खनन की अनुमति दी जाए। राज्य सरकार ने कहा कि खनन सामग्री की कमी के चलते एनएचएआई, केंद्र और राज्य के कई प्रोजेक्ट रुके हैं। सोमवार को वकीलों की हड़ताल के चलते याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी।
पंजाब के जल संसाधन, खनन और भूविज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार ने हाईकोर्ट में अवैध खनन के खिलाफ दायर याचिका के जवाब में यह हलफनामा दायर किया है। उन्होंने हलफनामे में बताया कि सीमा पर सेना और बीएसएफ अधिकारियों की खनन से खतरे के बारे में रिपोर्ट के बाद 28 अगस्त को हाईकोर्ट ने पाकिस्तान सीमा से सटे तीन जिलों में खनन पर रोक लगा दी थी।
राज्य सरकार ने दो रिटायर्ड चीफ इंजीनियर संजीव सूरी और राम लाल संधू व विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक अरुण कक्कड़ की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है जो पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर में रावी नदी के प्रवाह का व्यावहारिक अध्ययन करेगी। साथ ही सेना, बीएसएफ और अन्य विभागों की ओर से नदी के किनारे के क्षेत्र में निर्मित बुनियादी ढांचे पर खनन कार्यों के प्रभाव का अध्ययन भी करेगी।
कोर्ट को बताया गया कि एनएचएआई, केंद्र और राज्य सरकार के प्रोजेक्ट खनन सामग्री की कमी के चलते बाधित हो रहे हैं। प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य सरकार सेना के लगातार संपर्क में हैं और सेना को इन 16 साइट में से 6 पर खनन होने से कोई आपत्ति नहीं है। आर्थिक स्थिति और प्रोजेक्टों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से 28 अगस्त के आदेश में संशोधन की मांग की गई है।