पंजाब में गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए सरकार एक और कदम उठाने जा रही है। सरकार किसानों से लिया जाने वाला वाटर सेस खत्म करने की तैयारी में है। इसे लेकर सरकार ने अपने स्तर रणनीति बनाना शुरू कर दी है। अगर सब कुछ सही रहता हो नहरी पानी के प्रयोग पर भी भविष्य में जीरो बिल आएगा। हालांकि, पहले भी कई वर्षों से सरकार किसानों से पूरी तरह सेस नहीं वसूल रही है, लेकिन करोड़ों रुपये की राशि किसानों की तरफ से बकाया है।
विभाग के मुताबिक वाटर सेस प्रति एकड़ सौ रुपये के करीब बनता है। सरकार इसे खत्म कर किसानों को एक अच्छा संदेश देना चाहती है। सरकार पहले ही नहरी पानी से सिंचाई को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए नहरों और खालों को सुधारा गया है। अब कई स्तर पर मंथन किया जा रहा है।
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एक्ट मं संशोधन कर लागू किया था वाटर सेस
सिंचाई विभाग की तरफ इंडियन केनाल एवं ड्रेनेज एक्ट 1873 में संशोधन करके पुराने कर सिस्टम में संशोधन करके वाटर सेस लागू किया था। 22 जनवरी, 2010 में कैबिनेट में पिछले सालों की वसूली न करने का फैसला लिया था। जब किसानों ने वाटर सेस नहीं दिया तो सरकार ने रजवाहे बंद करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया था। किसानों के संघर्ष के बाद फैसला वापस ले लिया था। उसके बाद किसी भी सरकार ने वाटर सेस वसूलने की हिम्मत नहीं जुटाई। मौजूदा सरकार भी वाटर सेस के पक्ष में नहीं है।
208.21 करोड़ का बकाया
2014-15 से 2022-23 के समय का कुल 210.69 करोड़ का जल सेस बनता है। इसमें 2.48 करोड़ की वसूली हुई है, जबकि 208.21 करोड़ का बकाया है। चालू वित्त वर्ष में अगस्त तक 123.28 करोड़ रुपये बकाया हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसान मजबूरी में ही वाटर सेस की अदायगी करते हैं। दूसरी तरफ किसानों को भूमिगत जल निकासी के लिए बिजली मुफ्त दी जा रही है, जो औसतन प्रति कनेक्शन 53,984 रुपये सालाना बनती है।
प्रदेश में 13.91 लाख मोटर कनेक्शन हैं। करीब 25 सालों में सरकार इन्हें एक लाख रुपये की सब्सिडी दे चुकी है। नहरी पानी के प्रयोग में बढ़ोतरी होती है, तो बिजली सब्सिडी का बोझ भी खत्म होगा। प्रगतिशील किसान जगदीप सिंह कहते हैं कि अगर किसान अपनी सही भूमिका निभाते हैं, तो किसानों का ही फायदा होगा।
40 सालों बाद नहरों से खेतों में पहुंचा पानी
पंजाब सरकार ने 40 सालों बाद इस बार खेतों में नहरी पानी पहुंचाया है। जल संसाधन मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर के मुताबिक पंजाब में 13 हजार से अधिक खालों को ठीक करवाया गया है। किसानों को इससे काफी फायदा हुआ है। इसके अलावा कई आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है।