पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य में सुस्त निर्माण और बुनियादी ढांचा विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंजाब म्यूनिसिपल बिल्डिंग बाय लॉ में संशोधन किया है। स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा के अनुसार, नए उपनियमों में आवासीय, कामर्शियल और औद्योगिक इमारतें, जिनमें होटलों, मिनीप्लेक्स और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण की गतिविधियों को सभी हितधारकों के लिए अधिक सहज और परेशानी मुक्त बनाना है।
स्थानीय सरकार विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी संजय कुमार ने बताया कि उप नियमों को स्थानीय सरकार विभाग के टाउन प्लानिंग विंग द्वारा गत 31 दिसंबर को अधिसूचित किया गया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी तेजवीर सिंह, मुख्यमंत्री के स्पेशल सेक्रेटरी गुरकीरत किरपाल सिंह, स्थानीय सरकार विभाग के निदेशक भुपिंदर पाल सिंह और राज्य टाउन प्लानर कमल प्रीत कौर उपस्थित रहे।
संशोधित उपनियमों के अनुसार, राज्य में सिनेमाघरों को अब मिनिप्लेक्स माना जाएगा, जिनकी क्षमता पहले के दो से बढ़ाकर चार की गई है और सीटों की न्यूनतम सीमा भी 999 तक बढ़ा दी गई है, जो प्रति सिनेमा पहले 250 थी। इसके साथ ही, छोटे यूएलबी में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए, क्लास वन और क्लास टू कस्बों में छोटे प्लॉटों को समायोजित करने के उद्देश्य से मिनीप्लेक्स के लिए भूखंड का रकबा कम कर दिया गया है। इसके अलावा मालिक अथवा बिल्डर अब अपने मौजूदा सिनेमाघर को 50 फीट चौड़ी सड़क पर वाणिज्यिक घटक के साथ मिनीप्लेक्स में बदल सकते हैं। मिनीप्लेक्स की ग्राउंड कवरेज को भी बढ़ा दिया गया है।
सड़कों के विभिन्न आकारों पर मल्टीप्लेक्स के एफएआर में वृद्धि की गई है। यह पंजाब में अधिक मेगा परियोजनाओं को आमंत्रित करेगा, जो अधिक निवेश और रोजगार के अवसर लाएगा। मल्टीप्लेक्सों में अदायगी के आधार पर पंजाब पर्चेज ऑफ एफएआर के साथ-साथ निवेश के अवसरों को प्रोत्साहित करने के लिए ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट भी पेश किया गया है और एफएआर की खरीद की आवश्यक शर्तों में सुधार करते हुए इन्हें और स्पष्ट किया गया है।
ज्यादा फ्लैट बना सकेंगे बिल्डर, होटल-मोटल भी संशोधित नियमों में शामिल
बिल्डर अब अधिक फ्लैटों का निर्माण कर सकेंगे, जिससे उन्हें निवेश का अच्छा रिटर्न मिल सकेगा। इससे न सिर्फ शहरी पंजाब में अधिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा बल्कि शहरी स्थानीय इकाईयों की वित्तीय हालत में भी सुधार होगा और इससे ऐसे प्रोजेक्टों में अनधिकृत निर्माण की जांच भी हो जाएगी। शहरी पंजाब में योजनाबद्ध विकास और निवेश को उत्साहित करने के लिए होटल, मोटल और गेस्ट हाउसों को भी संशोधित नियमों में शामिल किया गया है।
पुराने नियमों में होटलों के लिए प्लॉट का आकार कम से कम 1000 वर्ग मीटर था लेकिन घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों के नजदीक किफायती होटलों की भी जरूरत थी। ऐसे क्षेत्रों में केवल छोटे आकार के प्लॉट उपलब्ध हैं, इसलिए प्लॉट का आकार 1000 वर्ग गज से घटाकर 200 वर्ग मीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही गेस्ट हाउसों, बोर्डिंग और रिहाइश व सेवा अपार्टमेंटों के नियमों में भी ढील दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप फ्लोटिंग आबादी को भी लाभ होगा।
कपड़ा उद्योग व सूचना तकनीक की इमारतों की ऊंचाई बढ़ी
पंजाब में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए टेक्सटाइल व कपड़ा उद्योग और सूचना तकनीक उद्योगों की इमारतों की ऊंचाई को 15 मीटर से बढ़ाकर 21 मीटर कर दिया गया है। यह सारे प्रयास औद्योगिक विकास और इससे जुड़े रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, संशोधित नियमों के तहत मेडिकल कालेजों के अस्पतालों या नर्सिंग कालेजों, होस्टलों को संस्थागत इमारतें माना जाएगा। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 10 एकड़ से अधिक रकबे वाली ऐसी मेडिकल संस्थागत इमारतों के क्षेत्र और एफएआर में इजाफा किया गया है।
ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों में क्रैच व प्राइमरी स्कूल
पहले नियमों में विभिन्न एक्ट के अधीन निर्माण कार्यों के लिए सीमित पाबंदीशुदा क्षेत्रों का जिक्र शामिल नहीं था लेकिन अब उसे इसमें शामिल कर लिया गया है। इससे आम लोगों को अब खरीद से पहले जमीन की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलेगी। संशोधित नियमों में अब ग्रुप हाउसिंग, ग्रुप हाउंसिंग प्लाटों की मरम्मत और सार्वजनिक सुविधाओं के नियमों को भी नियमित किया गया है। ऐसे प्रोजेक्टों में व्यापारिक उपयोग के लिए ढील दी गई है और अब वह कुछ शर्तों के तहत फ्रंट सड़कों पर व्पापारिक उपयोग कर सकेंगे। बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों में क्रैच और प्राइमरी स्कूल को भी मंजूरी दी गई है।
बालकनी का आकार भी बढ़ा
एफएआर के तहत, साथ ली जाने वाली बालकनी के आकार को 1.2 मीटर से बढ़ाकर 1.8 मीटर कर दिया गया है। यह ग्रुप हाउंसिंग प्रोजेक्टों के निर्माताओं के अनुकूल होगा और इससे ग्रुप हाउसिंग में रहने वालों को भी लाभ होगा। संशोधित नियमों में, रिहायशी क्षेत्रों में डे-केयर सेंटर और प्ले वे स्कूल भी उपलब्ध हैं। इसके साथ ही वृद्धाश्रम, दिव्यांग, मानसिक रोगी, कामकाजी औरतें, पुरुष होस्टल, प्रौढ़ शिक्षा केंद्र, अनाथालय/बच्चों के केंद्र, रैन बसेरा, धार्मिक इमारतें और आंगनबाड़ी के लिए केयर सेंटर नियम पेश किए गए हैं।
पेट्रोल पंपों के लिए सड़क की चौड़ाई घटाकर 60 फुट की
पिछले नियमों में पेट्रोल पंपों के लिए सड़क की चौड़ाई 100 फुट निर्धारित की गई थी, जिससे पेट्रोल कंपनियों को शहरी पंजाब में नए पेट्रोल पंप लगाने में निराशा हुई थी। छोटे शहर विशेष तौर पर प्रभावित हो रहे थे क्योंकि कोई भी सड़क आमतौर पर 100 फुट चौड़ी नहीं होती। वाहनों की बढ़ी संख्या को देखते हुए अब इस शर्त को सुधारते हुए सड़क की चौड़ाई 60 फुट कर दी गई है।