दोनों कैबिनेट मंत्रियों के अनुसार, मानसा जिले में 1,51,335 एकड़ क्षेत्रफल में कपास की फसल को 76-100 फीसदी नुकसान हुआ है, इसलिए इस जिले के लिए 181,60,21,050 रुपये की राशि जारी दी जा रही है। इसी तरह संगरूर में 145 एकड़ में 26-32 फीसदी, 3693 एकड़ में 33-75 फीसदी और 180 एकड़ में 76-100 फीसदी नुकसान हुआ है, जिसके लिए 2,24,01,328 रुपये की व्यवस्था की गई है। बठिंडा जिले में 683 एकड़ में 26-32 फीसदी, 85 एकड़ में 33-75 फीसदी और 1,88,308 एकड़ में 76-100 फीसदी नुकसान हुआ है, जिसके लिए 226,15,23,700 रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है। श्री मुक्तसर साहिब जिले में 1906 एकड़ में 26-32 फीसदी, 7922 एकड़ में 33-75 फीसदी और 50 एकड़ में 76-100 फीसदी का नुकसान हुआ है, जिसके लिए 4,71,90,800 रुपये की राशि जारी की जा रही है। बरनाला जिले में 143 एकड़ कपास को 26-32 फीसदी, 2639 एकड़ में 33-75 फीसदी और 11 एकड़ में 76-100 फीसदी नुकसान हुआ है। इसके लिए 1,46,70,950 रुपये की राहत की व्यवस्था की गई है। मंत्रियों ने बताया कि इस राशि में से कपास बीनने वाले मजदूरों को 10 फीसदी राशि दी जाएगी।
बारिश से प्रभावित जिलों में गिरदावरी जारी
हाल की बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अरुणा चौधरी ने बताया कि इस मामले में गिरदावरी के आदेश जारी किए जा चुके हैं। जैसे ही डिप्टी कमिश्नरों द्वारा रिपोर्टें भेजी जाएगी, मुआवजे के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि डिप्टी कमिश्नरों को एक हफ्ते में फसल के नुकसान के बारे में रिपोर्टें भेजने के लिए निर्देश दिए गए थे। इसी दौरान एक सवाल के जवाब में नाभा ने बताया कि सरकार द्वारा इस तरह के नुकसान से बचने के लिए अत्याधुनिक तकनीक लाई जा रही है।
किसानों से धोखा है कपास के लिए मामूली मुआवजा: शिअद
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने पंजाब सरकार द्वारा मालवा क्षेत्र में लाखों एकड़ में गुलाबी सुंडी के कारण खराब हुई कपास की फसल के लिए किसानों को मामूली मुआवजा दिए जाने को धोखा करार दिया है। पार्टी ने राज्य में प्रकाश सिंह बादल सरकार की ओर से घोषित की गई नीति के तर्ज पर ‘खेत मजदूरों’ के लिए वित्तीय पैकेज न दिए जाने की भी निंदा की है। वहीं किसानों को सफेद मक्खी के हमले के कारण भी नुकसान उठाना पड़ा है।
किसान विंग के अध्यक्ष सिकंदर सिंह मलूका ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों की ओर से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की स्पष्ट मांग के बावजूद कांग्रेस सरकार आंशिक मुआवजा नीति लेकर आई। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार किसानों को धोखा देना चाहती है, क्योंकि उसने 35 फीसदी फसल क्षति के लिए 2000 रुपये और 75 फीसदी फसल खराब होने के लिए 5400 रुपये का तुच्छ मुआवजा रखा है।
उन्होंने कहा कि सरकारी सूत्र यह साबित करने पर तुले हैं कि कपास की फसल को आंशिक क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि यह कपास किसानों की पीठ में छुरा घोंपने के समान है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम किसानों के साथ मिलकर काम करेंगे और पारदर्शी मुआवजे की मांग करेंगे। मलूका ने मुख्यमंत्री से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि खेत मजदूरों को मुआवजा देने से क्यों इंकार किया गया है? उन्होंने मांग की है कि 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा सभी खेत मजदूरों को जारी किया जाए।