लोकतांत्रिक किसान सभा के प्रदेश प्रधान डॉ. सतनाम सिंह अजनाला और प्रदेश महासचिव कुलवंत सिंह संधू की ओर से गुरुवार को जारी प्रेस बयान के अनुसार नए एमएसपी का पंजाब के किसानों को बहुत अधिक लाभ नहीं मिलेगा। पंजाब की मुख्य फसल धान की कीमत केवल 100 रुपये बढ़ाई गई है। मक्का की फसल के एमएसपी में 92 रुपये की वृद्धि की गई है। उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एमएसपी तय करने की मांग की।
महिला किसान यूनियन की अध्यक्ष राजविंदर कौर राजू ने खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि को ‘भाजपाई जुमला’ करार देते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार 14 खरीफ फसलों का एमएसपी कागजों में बढ़ाकर आम जनता के बीच अपना उल्लू तो सीधा कर सकती है लेकिन देश के मेहनती किसानों को मूर्ख नहीं बना सकती। हर साल की तरह इन फसलों को एमएसपी पर खरीदने की सरकार ने कोई गारंटी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा सरकार का सिर्फ एक कागजी जुमला ही है और ये घोषणाएं केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगी।
धान की एमएसपी में 100 रुपये की वृद्धि और अन्य खरीफ फसलों के एमएसपी में भी मामूली वृद्धि को किसानों के साथ भद्दा मजाक है। नई एसएसपी स्वीकार नहीं की जाएगी। केंद्र ने आज तक किसानों को उनकी फसलों का मूल्य लागत के अनुसार नहीं दिया है, बल्कि सियासी दाम देकर किसानों को कर्ज में धकेला जा रहा है। रामकरण सिंह रामा, महासचिव भाकियू लखोवाल टिकैत
डीजल, उर्वरक और कीटनाशकों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की तुलना में नई एसएसपी बहुत ही मामूली है। एमएसपी का एलान करने से पहले सरकार को महंगाई दर का भी आकलन करना चाहिए था। सुखदेव सिंह कोकरीकलां, महासचिव भाकियू उगराहां