पंजाब की पूर्व मंत्री जगीर कौर ने आरोप लगाया है कि जगदीश भोला ड्रग रैकेट मामले का एक आरोपी कांग्रेस प्रवक्ता सुखपाल खैरा का खास है। इतना ही नहीं कुछ दिन पहले फाजिल्का से तस्करी के आरोप में गिरफ्तार गुरदेव देबी भी खैरा का नजदीकी है।
उन्होंने बताया कि ड्रग रैकेट में फतेहगढ़ साहिब पुलिस ने एनआरआई अनूप सिंह काहलों को सबसे पहले गिरफ्तार किया था। उसी केस में दारा मथड्डा भी नामजद है, जो कनाडा चला गया था। अब उसे भगोड़ा करार दिया जा चुका है।
बताया कि खैरा भी पिछले दिनों कनाडा से लौटे हैं। जगीर कौर ने खैरा और दारा की तस्वीरें उपलब्ध कराईं। साथ ही एक वीडियो भी जारी किया। इसमें खैरा पर नोट बरसाए जा रहे हैं।
वह कार्यक्रम गुरदेव देबी की ओर से आयोजित किया गया था, जिसे कुछ दिन पहले फाजिल्का में ड्रग तस्करी के मामले में पकड़ा गया है। उन्होंने कहा कि ईडी से खैरा की संपत्ति की जांच कराई जानी चाहिए। वह इस बारे में सीएम को भी पत्र लिखेंगी।
खैहरा के संबंध माफिया और आतंकियों से
सवाल उठाया है कि सिर्फ 17 एकड़ जमीन वाला कोई व्यक्ति अपने गांव में पांच करोड़ का घर और चंडीगढ़ में चालीस करोड़ की कोठी कैसे बना सकता है। लग्जरी गाड़ियां और हाई-फाई लाइफ स्टाइल इतनी जमीन में संभव नहीं है।
जगीर कौर ने आरोप लगाया कि खैरा के संबंध फर्जी ट्रेवल एजेंट, लैंड माफिया और आतंकियों से हैं। पूरे इलाके में नौजवान नशे से बर्बाद हो चुके हैं। इसके लिए यही लोग जिम्मेदार हैं।
गिरफ्तार देबी के गांव से बड़े कबड्डी खिलाड़ी निकले थे, अब ज्यादातर युवा नशे की चपेट में हैं। उन्होंने कांग्रेस पर इस मामले में दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि वह विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाएंगी।
खैरा का पलटवार, झूठे और मनगढ़ंत हैं आरोप
पूर्व विधायक सुखपाल खैरा ने कहा है कि छज्ज तो बोले, छाननी क्यों बोले। जगीर कौर को पांच साल की कैद हो चुकी है। गांव बेगोवाल में 22 एकड़ नगर पंचायत की जमीन पर वह काबिज हैं, जिसकी कीमत सौ करोड़ है।
इस मामले में लोकपाल और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से उन्हें नोटिस जारी हो चुका है। जगीर कौर उन पर मनगढंत और बेबुनियाद आरोप लगा रही हैं। उन्होंने जो तस्वीरें दी हैं वह 2009 की हैं।
पुलिस भी मानती है कि उस समय गुरदेव देबी अपराधी नहीं था। वह अपने गांव का सरपंच था, उसके द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मैं शामिल हुआ था।
संपत्ति के मामले में खैरा ने कहा कि 17 एकड़ स्टैंडर्ड सीलिंग है। इससे ज्यादा जमीन सीएम प्रकाश सिंह बादल के पास भी नहीं हो सकती, फिर उनकी इतनी जायदाद कैसे बन गई।