मार्च में पंजाब, हरियाणा सहित समूचे उत्तर भारत में जनवरी के बाद से चौथी बार हुई भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इस माह में हुई बारिश ने न केवल सौ वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, बल्कि किसानों की रही सही उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण बेमौसम बारिश के साथ तेज हवाओं के झोकों ने पिछले तीन बार की बारिश के बाद संभली गेहूं की फसल को बिल्कुल बिछा दिया है। गेहूं के साथ-साथ सरसों, आलू, मटर और मौसमी सब्जियों को काफी नुकसान पहुंचा है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते 11 मार्च तक देश भर में औसत से 237 फीसदी अधिक बारिश हुई है।
पंजाब के किसानों को 351 और हरियाणा,चंडीगढ़ और दिल्ली के किसानों को 1015 फीसदी अधिक बारिश की मार झेलनी पड़ी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बेमौसम बारिश से जहां किसान बर्बाद होंगे, वहीं इसका खामियाजा आम लोगों को भी जेबें ढीली कर उठाना पड़ेगा।
हरियाणा कृषि विभाग के मुताबिक प्रदेश में सब्जियों और चने में 50 फीसदी, गेहूं में 20 और सरसों में 30 फीसदी तक नुकसान हुआ है। उधर, पंजाब में करीब पांच फीसदी गेहूं की फसल तबाह होने की आशंका जानकारों ने जताई है।
सरसों और चने की फसल भी बर्बाद हो गई
सरसों और चने की फसल भी बर्बाद हो गई है। रविवार को भी पंजाब-हरियाणा के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और ओला वृष्टि हुई। इससे खेतों में गेहूं की फसलें बिछ गईं।
हरियाणा के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ जिले में बारिश के साथ हुई ओलवृष्टि से फसल पूरी तरह से गिर गई है। रविवार को भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई।
रोहतक, हिसार, सिरसा, सोनीपत आदि में जहां बूंदाबांदी हुई वहीं फतेहाबाद, झज्जर, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी ठीकठाक बारिश हुई। रेवाड़ी के कुछ गांवों में ओलावृष्टि भी हुई है। पंजाब के फिरोजपुर और फरीदकोट जिले में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है।
अबोहर के आसपास के गांव डंगरखेड़ा, चूहड़ीवाल धन्ना, निहालखेड़ा और बजीतपुर कट्टियांवाली में तेज बरसात हुई। इसके अलावा फरीदकोट और अमृतसर जिले में भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई।
रविवार को हुई बारिश से फसल खराब होते देख आगरा के मलपुरा के किसान प्रेम सिंह और खंदौली के किसान राजेंद्र सिंह धाकरे की सदमे से मौत हो गई। इनके अलावा मैनपुरी के बरनाहल में किसान रोहन सिंह और मध्यप्रदेश के खंडवा में भी एक किसान की हृदयगति रुकने से मौत की सूचना है।
पंजाब में 34 लाख हेक्टेयर फसल पर संकट
मार्च में हो रही बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए मुसीबत बन गई हैं। बेमौसमी बरसात के कारण गेहूं और आलू की फसल तबाह होने की कगार पर पहुंच गई है। इन दोनों फसलों के तबाह होने से किसानों को करोड़ों रुपये का घाटा उठाना पड़ सकता है। इस समय पंजाब में 34 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बीजी गई है।
बारिशों के कारण किसानों को गेहूं की फसल पर तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। दूसरी तरफ पंजाब में 80 हजार हेक्टेयर में बीजी गई आलू की फसल भी इन बारिशों से अछूती नहीं रही है। इस बार मौसम जिस तरह से रंग बदल रहा है, उससे आलू की फसल तबाह होने का खतरा बढ़ गया है।
पोटैटो ग्रोअर एसोसिएशन के जसविंदर सिंह संघा का कहना है कि फसल को ज्यादा पानी लगने के कारण आलू गल सकता है। आलू के गलने के कारण उत्पादकों को नुकसान होना तय है। इससे बाजार में आलू की आमद कम होगी जिससे बाद आलू की कीमतें बढ़ जाएंगी।
ओलावृष्टि से ज्यादा नुकसान
कृषि अधिकारी स्वतंत्र कुमार ऐरी का कहना है कि बारिश के कारण फसलों को नुकसान होता है लेकिन ज्यादा नुकसान ओलावृष्टि के कारण होता है। ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल बैठ जाती है। फसल काली पड़ जाती है जिसके कारण उसका उचित दाम नहीं मिल पाता। अगर इस माह और बारिशें व ओलावृष्टि होती है तो किसानों के लिए यह मुश्किल घड़ी होगी।