हाईकमान ने सिद्धू का इस्तीफा नामंजूर करते हुए पंजाब के कांग्रेस नेताओं को अपने स्तर पर विवाद सुलझाने के निर्देश दिए, हालांकि इसके लिए अपने तीनों पर्यवेक्षकों को भी जिम्मेदारी सौंप दी थी। इस दौरान मुख्यमंत्री चन्नी ने सिद्धू को फोन करके इस्तीफे की वजह जाननी चाही, जिस पर सिद्धू ने उनसे दो दिन बाद मिलने की बात कही।
गुरुवार दोपहर सिद्धू ने ट्वीट किया कि चन्नी के बुलावे पर वे पंजाब भवन में मुख्यमंत्री से मिलेंगे। पंजाब भवन में बैठक के दौरान चन्नी, सिद्धू और हरीश चौधरी ही मौजूद रहे। सिद्धू पंजाब के कार्यकारी डीजीपी और एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग पर अड़े थे लेकिन मुख्यमंत्री इस बात पर कायम थे कि इन दोनों पदों पर नियुक्तियां हाईकमान की मंजूरी के बाद की गई हैं।
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सूत्रों के अनुसार, चन्नी ने बैठक में सिद्धू को भरोसा दिलाया कि आगामी नियुक्तियों के समय वे प्रदेश अध्यक्ष की भी राय लेंगे। इसके बाद भी सिद्धू अपने रुख पर अड़े रहे लेकिन हाईकमान द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी बनाने के फैसले के कारण उन्होंने अपनी मांगों को लेकर विवाद को ज्यादा नहीं बढ़ाया।
हरीश चौधरी बन सकते हैं पंजाब के प्रभारी
कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान ने पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत के निवेदन को आखिरकार सुन लिया है। उत्तराखंड चुनाव को देखते हुए पार्टी ने रावत को पंजाब की जिम्मेदारी से मुक्त करके उत्तराखंड में काम संभालने का फैसला किया है। रावत के स्थान पर हरीश चौधरी को पंजाब मामलों का प्रभारी बनाने की भी चर्चा है। इस संबंध में पार्टी हाईकमान द्वारा जल्द ही घोषणा की जा सकती है।