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पंजाब: कांग्रेस विधायक दल की बैठक स्थगित, अब सीधे दिल्ली से होगी मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा

Sun, 19 Sep 2021 11:08 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मुख्यमंत्री पद के लिए सुनील जाखड़ के नाम को लेकर अधिक संभावनाएं बनी हुई हैं। इस कारण से उनके घर कई कांग्रेसी विधायक बधाई देने के लिए पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ नवजोत सिंह सिद्धू खेमे के विधायक भी लामबंद हो रहे हैं।
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पंजाब कांग्रेस विधायक दल की बैठक स्थगित। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद रविवार को चंडीगढ़ में होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक स्थगित कर दी गई है। अब पंजाब के मुख्यमंत्री पद की घोषणा दिल्ली से की जाएगी। कई दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के नामों पर मंथन किया जा रहा है। इसमें अंबिका सोनी से भी सोनिया गांधी ने राय ली है। पंजाब से पहले नंबर पर सुनील जाखड़ और दूसरे पर नवजोत सिंह सिद्धू के नाम की चर्चा चल रही है।

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मुख्यमंत्री पद के लिए सुनील जाखड़ के नाम को लेकर अधिक संभावनाएं बनी हुई हैं। इस कारण से उनके घर कई कांग्रेसी विधायक बधाई देने के लिए पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ नवजोत सिंह सिद्धू खेमे के विधायक भी लामबंद हो रहे हैं। हालांकि 11 बजे आज होने वाली विधायक दल की बैठक स्थगित होने के कारण अब जो भी मुख्यमंत्री के लिए चेहरा फाइनल होगा उसके नाम की घोषणा दिल्ली से ही की जाएगी।

यह भी पढ़ें- पंजाब: अमरिंदर सिंह के इस्तीफे का जलियांवाला बाग कनेक्शन, केंद्र सरकार का बचाव करना कहीं भारी तो नहीं पड़ा 
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बनाए जाएंगे दो उपमुख्यमंत्री
पार्टी में मचे घमासान को शांत करने के लिए आलाकमान मुख्यमंत्री के साथ ही दो उपमुख्यमंत्री के नामों की भी घोषणा कर सकता है। पंजाब के जातीय समीकरण को साधने के लिए आलाकमान इसको जरूरी मान रहा है। सूबे में सिख के बाद हिंदू सबसे अधिक वोटर है, इसलिए यदि सिख मुख्यमंत्री घोषित होता है तो दो उपमुख्यमंत्री में एक चेहरा हिंदू और दूसरा दलित होगा।

कैप्टन के तेवरों से परेशान था आलाकमान
कांग्रेस आलाकमान कैप्टन के तल्ख तेवरों से परेशान था। पंजाब कांग्रेस में कैप्टन के बढ़ते रसूख और उनके निर्णय आलाकमान को परेशान कर रहे थे। कैप्टन ने अपने  नेतृत्व में चुनाव लड़ा और जीतकर आए, उसके बाद से उनके तेवर और तल्ख थे। मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर पंजाब सरकार के सभी फैसलों में कैप्टन की ही चली। लिहाजा आलाकमान को उनके विकल्प की तलाश तो 2017 से थी लेकिन चेहरा नहीं मिल रहा था। 
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नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने के बाद आलाकमान की यह तलाश पूरी हुई, जिसके बाद से लगातार कैप्टन के तेवर से परेशान आलाकमान कैप्टन पर इस्तीफे को लेकर दबाव बना रहा था। कैप्टन के सामने ऐसे हालात 2003 में भी पैदा हुए थे लेकिन उस समय कैप्टन इस संकट से उबरने में सफल रहे।

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