दरअसल, सदन में इस बार भी आम आदमी पार्टी का रुख कांग्रेस के प्रति नरम ही रहने वाला है। हालांकि बिजली के दाम को लेकर पार्टी सरकार को घेरती दिखाई देगी। लेकिन कांग्रेस का मुख्य मुकाबला अकाली दल-भाजपा गठबंधन से होना है, जिसके खिलाफ कांग्रेस ने अपनी पुरानी रणनीति को बनाए रखते हुए बेअदबी, बरगाड़ी और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मुद्दा बनाने का फैसला किया है। फिर भी कांग्रेस की दिक्कत यह है कि सदन में अकाली दल को ललकारेगा कौन? यह काम अब तक नवजोत सिंह सिद्धू करते रहे हैं।
कांग्रेस विधायकों को अपनी ही सरकार के शिकायतें
शुक्रवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक विधानसभा सत्र के लिए रणनीति बनाने को लेकर बुलाई गई थी लेकिन बैठक में रणनीति से पहले करीब आधा दर्जन विधायकों ने कैप्टन के सामने शिकायतों का पिटारा खोल दिया। ज्यादातर विधायकों की शिकायत हलकों में विकास कार्य से है। आरोप है कि विकास के लिए फंड जारी नहीं हो रहा।
प्रदेश के मंत्री ही विधायकों की बात नहीं सुनते। विधायकों ने कैप्टन से कहा कि विकास कार्य शुरु नहीं होने के कारण अब उनके लिए अपने हलकों के लोगों को जवाब देना मुश्किल हो गया है। तब कैप्टन ने कहा कि सोमवार को विधायकों के साथ वे फिर से बैठक करके उनकी समस्याएं दूर करेंगे।