पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिद्धू ने पंजाब में रेल ट्रैक पर बैठे गन्ना किसानों का समर्थन किया है। सिद्धू का कहना है कि गन्ना किसानों के मुद्दे को तुरंत हल करने की जरूरत है। उन्होंने ट्वीट किया कि अजीब बात है कि पंजाब में खेती की उच्च लागत के बावजूद राज्य की सुनिश्चित कीमत हरियाणा/यूपी/उत्तराखंड की तुलना में बहुत कम है।
इससे पहले गन्ना उत्पादक किसानों और पंजाब सरकार के बीच रविवार को चंडीगढ़ में हुई बैठक बेनतीजा रही थी। इसके बाद किसानों ने आंदोलन जारी रखने का एलान किया। स्टेट अशोर्ड प्राइस (एसएपी) को लेकर दोनों पक्षों में करीब 90 मिनट चली बैठक में सरकार अपने विशेषज्ञों की ओर से तय गन्ने के लागत मूल्य पर अड़ी रही, जबकि किसान संगठन अपने हिसाब से तय किए लागत मूल्य पर कायम रहे।
अधिकारियों ने गन्ने की उत्पादन लागत 350 रुपये बताई तो किसानों ने गन्ना उगाने में 388 रुपये खर्च आने का हिसाब उनके सामने रख दिया। किसानों ने यह भी तर्क दिया कि हरियाणा में गन्ने की उत्पादन लागत 358 रुपये तय की गई है। सरकार ने किसानों की मांग मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद बात उलझती देख सरकार ने सोमवार को जालंधर में विशेषज्ञों और किसानों की बैठक में उत्पादन लागत नए सिरे से निकालने का फैसला लिया।
सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सोमवार को जालंधर में फिर से बैठक बुलाई गई है। इसमें कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के विशेषज्ञ गन्ने की उत्पादन लागत पर फैसला लेंगे। बैठक में जो भी फैसला होगा, उसे मंगलवार को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। मंगलवार को ही सरकार की किसान संगठनों के साथ चंडीगढ़ में फिर से बैठक होगी।