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सिद्धू का दबाव होने लगा बेअसर: पंजाब में अनायास ही कांग्रेस का स्टार चेहरा बन गए सीएम चरणजीत चन्नी 

Sat, 22 Jan 2022 11:49 AM IST
निवेदिता वर्मा हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद चन्नी अपने कामकाज के तरीके से जल्दी ही लोकप्रिय हो गए। खास बात यह रही कि कैप्टन की तरह चन्नी पर भी नवजोत सिद्धू ने दबाव बनाने की जो रणनीति अपनाए रखी, पहली बार सिद्धू के लिए नुकसानदायक साबित हुई
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सीएम चरणजीत चन्नी। - फोटो : twitter @CHARANJITCHANNI
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विस्तार
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पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी रिश्तेदारों पर ईडी की कार्रवाई ने भले ही मौजूदा चुनावी माहौल में चन्नी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, लेकिन तेजी से बदलते रहे हालिया  सियासी घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री चन्नी को अनायास ही सत्तारूढ़ कांग्रेस का स्टार चेहरा बना दिया है। इसी का नतीजा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी हाईकमान पर लगातार दबाव बना रहे प्रदेश कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की पार्टी में कहीं कोई सुनवाई होती दिखाई नहीं दे रही और चन्नी को अगला मुख्यमंत्री चेहरा घोषित न करके भी कांग्रेस पूरी ताकत से चन्नी के बचाव में खड़ी हो गई है।

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दरअसल, कैप्टन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद चन्नी अपने कामकाज के तरीके से जल्दी ही लोकप्रिय हो गए। खास बात यह रही कि कैप्टन की तरह चन्नी पर भी नवजोत सिद्धू ने दबाव बनाने की जो रणनीति अपनाए रखी, पहली बार सिद्धू के लिए नुकसानदायक साबित हुई और चन्नी किसी बयानबाजी में उलझने के बजाय खुद को जनप्रिय मुख्यमंत्री के तौर पर स्थापित करने में सफल हो गए। सरकार में अफसरों की नियुक्तियों को लेकर सिद्धू द्वारा चन्नी सरकार पर बनाए गए दबाव ने आम लोगों के बीच सिद्धू के लिए प्रतिकूल धारणा बना दी। हालांकि पार्टी हाईकमान इसके बावजूद सिद्धू की प्रत्येक मांग को स्वीकार करके चन्नी को ही फैसले बदलने के लिए मजबूर करता रहा।

विधानसभा चुनाव-2022 के लिए हाईकमान ने जैसे ही यह एलान किया कि कांग्रेस मुख्यमंत्री चन्नी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी, सिद्धू मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी पेश करने हाईकमान के पास पहुंच गए। आखिर हाईकमान ने यह कहकर मामला शांत किया कि कांग्रेस के अगले मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव के बाद होगा। हाईकमान के इस फैसले से सिद्धू तो शांत हुए लेकिन पंजाब की अनुसूचित जाति की आबादी में इसका विपरीत असर हुआ। सियासी गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ गई कि अनुसूचित जाति के होने के कारण कांग्रेस चन्नी को साइडलाइन कर देगी, जैसे महाराष्ट्र में किया गया था।

हाईकमान के लिए ऐसे महत्वपूर्ण हो गए चन्नी

भाजपा की फिरोजपुर रैली की असफलता और पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक की घटनाओं ने चन्नी को सुर्खियों में ला दिया। मुख्यमंत्री चन्नी ने जिन प्रशासनिक कुशलता और सियासी सूझबूझ का परिचय दिया, उसने न सिर्फ विरोधियों का मुंह बंद कर दिया बल्कि कांग्रेस हाईकमान को भी चन्नी की उपयोगिता समझ में आ गई। मुख्यमंत्री चन्नी बड़ी कुशलता से पंजाब को राष्ट्रपति शासन के खतरे से निकाल लाए। इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा चूक की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पंजाब का पक्ष इतनी मजबूती से रखा कि केंद्र सरकार की जांच का जिम्मा गृह मंत्रालय को सौंपने की योजना धरी रह गई। इसके साथ ही पंजाब में किसानों और अन्य लोगों को यह भी नहीं लगा कि चन्नी केंद्र सरकार के दबाव में आ गए हैं। यही कारण है कि अब ईडी की कार्रवाई शुरू होते ही पूरी कांग्रेस चन्नी के पीछे आ खड़ी हुई है और हर स्तर पर चन्नी का बचाव किया जा रहा है। भले ही इस मुद्दे पर नवजोत सिद्धू खामोश हैं।

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कभी पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब कांग्रेस का चेहरा माना जाता था। 2017 के विधानसभा चुनाव भी कैप्टन के नेतृत्व में सफलता पूर्वक लड़े गए थे। कैप्टन के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में यह चर्चा तेज थी कि सूबे में पार्टी की पहचान कौन सा नेता होगा? कमोबेश यह कमी चरणजीत सिंह चन्नी ने पूरी कर दी है, भले ही इस रुतबे के दावेदारों में सिद्धू समेत कई दिग्गज प्रयास में हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी ने पंजाब में कांग्रेस को 2022 के चुनाव में भी मुख्य दावेदार बनाए रखने में सफलता हासिल कर ली है।

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